हिसार। अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस की राह आसान और हाईटेक होगी। अपराधी के किसी भी उम्र व समय में किए गए छोटे से छोटे से अपराध का डाटा भी पुलिस के पास फिंगरप्रिंट सहित सेव रहेगा। यानी कभी भी किसी आरोप के पकड़े जाने पर पुलिस यह पहचान कर सकेगी कि उक्त आरोपी पहले भी कोई अपराध कर चुका है या नहीं। अपराधियों की पूरी कुंडली पुलिस के पास ऑनलाइन सुरक्षित रहेगी और उसके फिंगरप्रिंट से उसकी हिस्ट्री पता की जा सकेगी।
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के पंडित दिनदयाल उपाध्याय इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर के युवा इनोवेटर मोहित कुमार ने अपनी टीम हिमांशु और सुनील के साथ मिलकर मार्गदर्शक डॉ. ओपी सांगवान के दिशा निर्देशन में एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड मैनेजमेंट टूल नामक इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पुलिस को कई फायदे होंगे।
नेशनल क्राइम ब्यूरो को दिया प्रेजेंटेशन
युवा इनोटवेटर मोहित कुमार ने बताया कि उन्होंने मशीन लर्निंग व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमेज प्रोसेसिंग तकनीक, पायथन लैंग्वेज और रिएक्ट लैंग्वेज आदि का इस्तेमाल कर यह सॉफ्टवेयर बनाया है। इस सॉफ्टवेयर का प्रेजेंटेशन मधुबन अकादमी करनाल व नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो को दिया था, जहां इसकी सराहना के साथ-साथ कुछ सुझाव भी दिए गए थे। इन सुझावों पर इनोवेटर्स अभी कार्य कर रहे हैं।
पुलिस की जांच का दायरा और समय घटेगा
किसी अज्ञात आपराधिक घटना के बाद पुलिस साक्ष्य व फिंगरप्रिंट जुटाती है। इसके बाद फिंगरप्रिंट को संदिग्ध लोगों के फिंगरप्रिंट के मिलान व जांच के लिए मधुबन लैब में भेजा जाता है। इसमें लंबा समय लगता है। समय और पैसे की बर्बादी के साथ-साथ संदिग्ध को भी हिरासत में लेने से बचाया जा सकता है। अगर इस सॉफ्टवेयर में अपराधियों का डाटा सेव रहेगा तो घटनास्थल पर मिले फिंगरप्रिंट को सॉफ्टवेयर में सेव अपराधियों के फिंगरप्रिंट से मैच कर जांच को समिति किया जा सकता है। इससे पता लगाया जा सकेगा कि घटना को अंजाम देने वाला पेशेवर अपराधी है या नहीं।
ये होंगे फायदे
- अपराधियों का डाटा सेव रहेगा।
- एक अपराधी अन्य स्थानों पर अपराध करते हुए पकड़ा जाता है तो पुलिस मिनटों में पता लगा सकेगी कि उसने पहले कोई अपराध किया है या नहीं।
- पुलिस की जांच का दायरा और समय दोनों घटेंगे।
- सॉफ्टवेयर सटीक जानकारी देगा।
- निर्दोष संदिग्ध जेल में है तो जल्द छूट सकेगा।
- जांच अधिकारियों को जांच जल्द पूरी करने में सुविधा होगी।
- पुलिस को पता रहेगा कि पकड़े गए आरोपी का किस थाने में क्या केस चल रहा है।
चेहरा पहचानने के प्रोजेक्ट पर काम करने की अनुमति मांगी
प्रोजेक्ट मेंटर डॉ. ओपी सांगवान ने बताया कि हमने पुलिस की जरूरत व सुविधा के अनुसार सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसमें पुलिस के फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट सहित कई एक्सपर्ट का सहयोग लिया गया था। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो सहित विभिन्न एजेंसियों के सुझावों के अनुसार फिलहाल हमने चेहरा पहचानने पर काम करने के लिए भारत सरकार के फोरेंसिक साइंस सर्विस निदेशालय में प्रोजेक्ट भेजा है।