हिसार। शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित गांव मंगाली की पहचान अब खेल गांव से हो चुकी है। गांव की बेटियों ने फुटबाल में न केवल अपने किक के दम से देश के लिए पदक जीते, बल्कि अपने जज्बे, जुनून और जोश से सरकारी नौकरी हासिल कर परिवार का सहारा भी बनीं। चार साल में 15 बेटियों ने खेल कोटे के तहत शिक्षा, रेलवे, शस्त्र सुरक्षा सीमा बल में नौकरी हासिल कर गांव का नाम रोशन किया है। फिलहाल गांव में फुटबाल कोच नरेंद्र कुमार बेटियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वहीं, गांव की बेटी सुमन पंजाब के फगवाड़ा में फुटबाल कोच के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
करीब 18 साल पहले वर्ष 2004 में मंगाली के राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सुखविंद्र कौर की डीपीई के पद पर नियुक्ति हुई। उस समय स्कूल में कोई भी बेटी नहीं खेलती थी। धीरे-धीरे उन्होंने स्कूल की बेटियों को खेल के प्रति जागरूक किया और फुटबाल खिलवाना शुरू किया। शुरू में पांच-छह खिलाड़ी ही अभ्यास के लिए जुट पाईं। एक साल बाद यहां फुटबाल खेलने वाली बेटियों की संख्या 11 हो गई। आज इस मैदान पर देश के लिए 120 बेटियां पसीना बहा रही हैं।
ये बेटियां इस विभाग में दे रहीं सेवाएं
- नाम पिता का नाम विभाग पद
- लक्ष्मी ऋषिराम शस्त्र सुरक्षा सीमा बल सोनाबाड़ी(असम) कांस्टेबल
- अंजू कृष्ण कुमार शस्त्र सुरक्षा सीमा बल बाग डोगरा(पश्चिम बंगाल) कांस्टेबल
- अनीता सरजीत शस्त्र सुरक्षा सीमा बल बाग डोगरा(पश्चिम बंगाल) कांस्टेबल
- पूनम ओमप्रकाश कृषि विभाग हिसार ग्रुप डी
- पूनम मेवा सिंह पीडब्ल्यूडीबीएंडआर करनाल ग्रुप डी
- ममता धर्मपाल पीडब्ल्यूडीबीएंडआर हांसी ग्रुप डी
- किरण उमेद सिंह शिक्षा विभाग भिवानी बोर्ड क्लर्क
- मोनिका राम कुमार शिक्षा विभाग पंचकूला क्लर्क
- पूनम ओमप्रकाश कृषि विभाग हिसार ग्रुप डी
- ममता जयसिंह रेलवे, हाजीपुर क्लर्क
- पूजा आत्माराम ग्रुप डी
- पुष्पा रोहताश सुथार ग्रुप डी
- सिलोचना किताब सिंह शस्त्र सीमा सुरक्षा बल सोनाबाड़ी(असम) कांस्टेबल
- सुमन मोहनलाल- लवली प्रोफेसर यूनिवर्सिटी फगवाड़ा फुटबाल कोच
- सुमन शिले दुलीचंद पीडब्ल्यूडीबीएंडआर भिवानी ग्रुप डी
आज मंगाली में 120 बेटियां ले रही प्रशिक्षण
फुटबाल कोच नरेंद्र कुमार का कहना है कि आज गांव मंगाली में करीब 120 बेटियां सुबह-शाम फुटबाल का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें 70 से ज्यादा बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हैं। 50 बेटियां स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा चार बेटियां इंटरनेशनल स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इनमें से काजल और नेहा जमशेदपुर में फुटबाल वर्ल्ड कप के लिए लगे कैंप में प्रशिक्षण ले रही हैं। वहीं रेणू और मोना गांव में ही प्रैक्टिस कर रही है।
विपरित परिस्थितियों में भी नहीं मानी हारी
मंगाली की बेटियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और डटकर सामना किया। किसी के पिता किसान हैं तो किसी के पिता मजदूरी कर परिवार का खर्चा चला रहे हैं। इतना ही नहीं, फसलों के सीजन समय में काफी बेटियां दूसरों के खेतों में काम कर गुजारा करती हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन ने 30 बेटियों को दी थी खेल किट
मंगाली की अधिकतर बेटियां गरीब परिवार से हैं। किसी के पास खेलने का सामान नहीं था तो किसी के पास ड्रेस। 16 फरवरी 2021 को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हांसी में आयोजित कार्यक्रम में 30 बेटियों की मदद करते हुए खेल किट दी गई थी।
आज मंगाली की बेटियां पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर रही हैं। ग्रामीण आंचल की बेटियां न केवल खेल तक सीमित रही हैं, बल्कि इन बेटियों ने खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरी भी हासिल की हैं।
- नरेंद्र कुमार, कोच, फुटबाल