हरियाणा पुलिस के अधिकारी प्रदेश में दुराचार के मामलों की जांच अब भी पुराने तरीके से कर रहे हैं। जबकि ऐसे मामलों की जांच करने वाले अधिकारियों को और हाईटेक होने की जरूरत है।
लिहाजा ऐसे जांच अधिकारियों की काउंसलिंग बहुत जरूरी है।
इस समय जो अधिकारी जांच कर रहे हैं, उनकी जांच का तरीका पुराना है।
डकैती, हत्या और चोरी के मामलों की तरह ही वे दुराचार मामलों की जांच भी आम तरीके से करते हैं। जिस तरह से प्रदेश में दुराचार के मामले बढ़े हैं, जांच अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाना भी जरूरी है।
पुलिस के एडीजीपी रिफार्म ने इस संबंध में डीजीपी हरियाणा को पत्र लिखकर सिफारिश की है।
सिफारिश में कहा गया है कि ऐसे मामलों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में जांच अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है।
जांच अधिकारियों को जुवेनाइल बोर्ड, सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देेशों आदि के बारे में प्रशिक्षित करना जरूरी है, जिससे जांच की दिशा सही हो सके।
पत्र में रोहतक के एक ऐसे मामले का हवाला दिया गया है जिसमें अधिकारी ने एक टीवी चैनल की खबर का हवाला दिया है।
यह है जरूरी
- प्री काउंसलिंग के बिना पीड़ित (नाबालिग) अपनी बात नहीं रख पाती
- सच सामने नहीं आएगा तो शिकायत ठीक से नहीं दर्ज होगी
- शिकायत ठीक से दर्ज नहीं होगी तो धारा सही नहीं लगेगी
- धारा सही नहीं लगेगी तो जांच ठीक से नहीं होगी