हरियाणा के विधायकों को ज्ञान की पाठशाला रास नहीं आ रही है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की ओर से विधायकों की प्रतिभा निखारने के लिए आयोजित कार्यशालाओं में विधायक जाने का नाम नहीं ले रहे हैं।
ऐसा तब है जब इन कार्यशालाओं में विधायकों को राजनीतिक घटनाक्रम के अलावा बहुत कुछ सीखने को मिलता है। खासकर नए विधायकों का यहां जाना जरूरी है, लेकिन वे भी इन कार्यशालाओं में नहीं जा रहे हैं।
इंडिया लीडरशिप विषय पर दो माह पहले पिंजौर में हुई कार्यशाला में भी मुख्यमंत्री और स्पीकर की उपस्थिति के बावजूद मात्र 25 विधायक पहुंचे, लंच के बाद सिर्फ दस विधायक ही बचे।
अब तक आठ कार्यशालाएं देश के विभिन्न हिस्सों में हो चुकी हैं, लेकिन इन कार्यशालाओं में नाम मात्र के विधायक पहुंचते हैं। इन कार्यशालाओं में सबसे अधिक भागीदारी सिक्किम और पांडिचेरी जैसे राज्यों की है। अभी तक जो विधायक इन कार्यशालाओं में हरियाणा की तरफ से गए हैं, उनके अनुभव बहुत बेहतर रहे हैं।
जो विधायक इन कार्यशालाओं से लौटते हैं वे विधानसभा में भी बहस के दौरान बेहतर तर्क देते हैं। ऐसा तब है जब विधायकों का वहां पर ठहरने और भोजन की सुविधा मुफ्त है। हरियाणा विधानसभा में स्पीकर ऐसी कार्यशालाओं में जाने के लिए अनुमति देने में भी आनाकानी नहीं करते हैं।
मैं वित्त मंत्री रह चुका हूं, ऐसे में मुझे इन वर्कशॉप के माध्यम से 40 प्रतिशत अधिक जानकारी मिली। विधानसभा में चर्चा मजबूत करने में यह बहुत सहायक है।
विधायक संपत सिंह
मुझे ऐसी कार्यशाला में जाकर यह लगा है कि यह कार्यशाला बहुत अहम हैं। इनके जरिए बहुत जानकारी हासिल होती है। साथ में अपना भी विकास होता है।
विधायक बीबी बतरा
यह रहे हैं कार्यशालाओं के विषय:
- इंडियन लीडरशिप
- इंडिया पालिसी
- एनालिसिस आफ बजट
- क्रिएटिंग जॉब्स