फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana: पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बीजेपी पर तंज, कहा- मनोहर सरकार से न किसान खुश और न खिलाड़ी

Mon, 17 Jul 2023 10:34 AM IST
नवीन दलाल अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा की मनोहर सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि न किसान खुश हैं और न ही खिलाड़ी। वहीं, कांग्रेस की गुटबाजी पर हुड्डा ने खुलकर बात नहीं की।
विज्ञापन
हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा कहते हैं कि साल 2014 के बाद से हरियाणा पिछड़ गया है। न किसान खुश हैं और न ही खिलाड़ी। मनोहर सरकार के कार्यकाल में आए दिन धरने-प्रदर्शन होते हैं। सरकार जब से पोर्टल लेकर आई है, तब से आम लोग परेशान हैं। प्रदेश सरकार जब किसी मोर्चे पर फेल होती है तो वह नया पोर्टल लेकर आ जाती है। यदि मेरी सरकार आई तो जो पोर्टल जनहित में नहीं होंगे, उन्हें बंद कर दूंगा।

विज्ञापन


पार्टी में गुटबाजी का सवाल टाल गए
कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी पर हुड्डा ने खुलकर बात नहीं की। कहते हैं कि सब ठीक चल रहा है। सभी पार्टी का काम कर रहे हैं। सरकार के कामकाज, अमित शाह से दोस्ती और संगठन को लेकर अमर उजाला के राज्य ब्यूरो प्रमुख आशीष वर्मा ने उनसे बात की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...।

प्रश्न: मनोहर लाल सरकार के नौ साल को किस तरह से देखते हैं?
यह नॉन परफार्मिंग सरकार है, जो प्रदेश साल 2014 में प्रति व्यक्ति आय, निवेश, नौकरी देने में, कानून-व्यवस्था में, खेलों में नंबर वन था, आज वह बेरोजगारी, महंगाई, अपराध के मामलों में नंबर वन है। बिजली उत्पादन में सरकार फेल रही है। इस सरकार ने बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए एक भी नई यूनिट नहीं लगाई। जब मैंने सत्ता संभाली थी तब सिर्फ एक थर्मल प्लांट था। मैंने चार थर्मल प्लांट लगाए। इसमें एक यमुनानगर का भी शामिल था, जिसे शिफ्ट किया जा रहा है।
विज्ञापन


यह सरकार एक भी नया शिक्षण संस्थान नहीं लाई, जबकि हरियाणा को हमने एजुकेशन हब बनाया। अंबाला में हमने टूल रूम मंजूर कराया था। यह सेंट्रल गवर्नमेंट की योजना थी। आज तक इसे भी पूरा नहीं किया गया। डीजल के रेट आसमान छू रहे हैं। पहले बोर्ड लगते थे कि दिल्ली-पंजाब से सस्ता डीजल हरियाणा में। मेरी सरकार के दौरान डीजल पर नौ रुपये वेट था, इन्होंने 18 रुपये कर दिया, जबकि उस दौरान कॉस्ट ऑफ इनपुट काफी कम था। खाद, कीटनाशक, ट्रैक्टर पार्ट्स पर टैक्स नहीं था। आज सब पर जीएसटी है। घोटालों की तो गिनती नहीं है। हर घोटाले के बाद एसआईटी बनाते, लेकिन कभी एसआईटी की रिपोर्ट जनता के सामने नहीं रखते।

प्रश्न: मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि हम कांग्रेस से दोगुनी नौकरियां दे रहे हैं?

आंकड़े निकालकर देख लें। हरियाणा में सबसे ज्यादा बेरोजागारी है। एक लाख तो सिर्फ फरीदाबाद में बेरोजगार हैं। नई इंडस्ट्री कौन सी आई। वे कहते हैं कि खरखौदा में मारुति की यूनिट लगा रहे हैं। जबकि यह यूनिट नौ साल पहले बन जानी चाहिए थी।

जब मैं मुख्यमंत्री था तो जापान जाकर सुजुकी के मालिक से बात की थी। तब वह खरखौदा में यूनिट लगाने को तैयार थे। हमारी सरकार में नौकरी को लेकर कोई भ्रष्टाचार नहीं था। इनके समय में तो हरियाणा लोक सेवा आयोग में करोड़ों रुपये की अटैचियां पकड़ी गईं। आयोग का उपसचिव करोड़ों रुपये के साथ पकड़ा जा चुका है। खुद को बचाने के लिए ये दूसरों पर आरोप लगाते हैं।

प्रश्न: हरियाणा सरकार का दावा है कि वह किसानों को सबसे ज्यादा एमएसपी दे रहे हैं?

यदि ऐसा होता तो किसान धरने पर नहीं बैठते। ये तो भावांतर योजना की आड़ में किसानों के साथ धोखेबाजी कर रहे हैं। सूरजमुखी का एमएसपी रेट 6450 है। बाजार में किसान की सूरजमुखी 4500 रुपये में बिक रही है। उसके बाद ये एक हजार रुपये भावांतर दे रहे हैं। इस हिसाब से कुल 5500 रुपये बनते हैं। एमएसपी के मुकाबले एक हजार रुपये कम। भावांतर तो वहां दिया जाता है, जहां एमएसपी नहीं होता। सिर्फ धान की फसल पर दस साल में हमने 14.3 फीसदी एमएसपी बढ़ाई। जबकि भाजपा सरकार में सिर्फ छह फीसदी बढ़ा है।

प्रश्न: परिवार पहचान पत्र व प्रॉपर्टी आईडी कैसी योजनाएं है?

सच्चाई तो यह है कि जब ये सरकार किसी मोर्चे पर फेल हो जाती है तो नया पोर्टल खोल देती है। मैं पोर्टल के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन जो जनहित में है, उसके पोर्टल खोलने चाहिए। कांग्रेस की सरकार आने पर जो भी पोर्टल जनता के हित में नहीं लगेंगे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा।

प्रश्न: कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर रहती, चुनाव को सिर्फ एक साल रह गया, फिर भी आप एकजुट नहीं है?

मुझे नहीं लगता कि कोई गुटबाजी है। पहले भी कांग्रेस एक थी और अब भी एक है। कोई भी पार्टी विरोधी काम नहीं कर रहा, सब पार्टी का काम कर रहे हैं।

प्रश्न: कांग्रेस अब तक संगठन नहीं बना पाई है, भाजपा ने तो रैलियां शुरू कर दी हैं?

कांग्रेस का संगठन तैयार है। हमारे नए प्रभारी जल्दी इसकी घोषणा करने वाले हैं। छत्तीसगढ़ में इसी साल चुनाव होने हैं। उस प्रदेश के अध्यक्ष तो दो दिन पहले घोषित किए गए हैं। भले ही भाजपा ने रैलियां कर ली हों, लेकिन कांग्रेस के विपक्ष आपके द्वार में जितनी भीड़ उमड़ रही है उतनी भीड़ अब तक भाजपा की किसी रैली में नहीं दिखी।

प्रश्न: क्या पार्टी को चुनाव से पहले सीएम चेहरा घोषित करना चाहिए?

कांग्रेस पार्टी का एक सिस्टम है। चुनाव के बाद पार्टी आब्जर्वर लगाती है। चुने गए विधायक अपनी पसंद बताते हैं। आब्जर्वर विधायकों की बात लेकर आलाकमान तक पहुंचाते हैं। उसके बाद सीएम चुना जाता है। साल 2005 में चुने गए विधायकों की मीटिंग में लोगों ने मुझे चुना था, जबकि उस समय मैं विधायक भी नहीं था। वहीं, भजनलाल मीटिंग का बायकट कर गए थे। उसके बाद पार्टी ने मुझे सीएम चुना था।

प्रश्न: आम आदमी पार्टी ने पिछले दिनों 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने बात कही है, आपका क्या नजरिया है?

हमने तो एक साल पहले ही घोषणा कर दी थी कि सरकार बनने पर 300 यूनिट मुफ्त बिजली देंगे। बिजली के साथ पेंशन भी बढ़ाएंगे। बुजुर्गों को छह हजार रुपये पेंशन देंगे। गरीबों को 100-100 गज के मुफ्त प्लॉट देने की हमारी योजना को इस सरकार ने बंद कर रखा है। उसे हम फिर से शुरू करेंगे। पिछड़ी जाति का क्रीमी लेयर छह लाख से दस लाख भी करेंगे।

प्रश्न: यह सब तो चुनावी घोषणा पत्र की बातें हैं, अभी तक पार्टी का कोई घोषणा पत्र नहीं बना है?

इससे कोई मतलब नहीं। जो मैंने घोषणाएं की हैं, वह सब पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल होंगी।

प्रश्न: आपकी जब सरकार थी, तब उत्तर हरियाणा की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं?

ऐसा नहीं है। पावर प्लांट यमुनानगर में लगवाया। करनाल में कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज हमारी सरकार के समय खुला। पंचकूला के अस्पताल को हमने अपग्रेड करवाया। पंचकूला में नेशनल फैशन डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट भी हमारी सरकार की देन है।

प्रश्न: अमित शाह हरियाणा में आकर आप पर ही निशाना क्यों साधते हैं?

वे मेरे दोस्त हैं। इसलिए उन्होंने मेरा नाम लिया। राजनीति में दो किस्म की मित्रता होती है। आप समझ गए होंगे।
विज्ञापन

प्रश्न: कांग्रेस पिछला चुनाव किन वजहों से हारी थी?

सच्चाई तो यह है कि जनता ने इनको हराने और कांग्रेस को जिताने का मन बना लिया था। कहीं न कहीं चूक हमसे हुई। हो सकता है कि टिकट वितरण में कहीं गलतियां हो गई हों। यह फिर जमीनी प्रचार में कमी रह गई। मेरा आकलन कहता है कि यदि चार हजार वोट और मिलते तो कांग्रेस प्रदेश में सबसे बड़ा दल होता। हम लोगों को दोष नहीं देना चाहते।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें