फतेहाबाद। महिलाएं चाहे परिवार के अंदर हों या बाहर उनके साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न बढ़ा है, बेशक सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सेवाएं बढ़ा दी है। महिलाओं के साथ छेड़छाड़, दुष्कर्म और दहेज प्रताड़ना बढ़ रहा है, ये ही नहीं शादी करवाकर ससुराल में जाने के बाद महिलाएं समायोजन न कर पाने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित भी हो रही हैं।
मनोचिकित्सक की ओपीडी में करीब 60 फीसदी महिलाएं ही होती हैं, जो कि तनाव व अन्य मनोरोग से ग्रस्त होती हैं। महिला के विरुद्ध अपराध की बात करें तो छेड़छाड़ के पिछले साल जहां 50 केस सामने आए थे वहीं इस साल अब तक 45 मामले दर्ज हो चुके हैं। दहेज प्रताड़ना के केसों में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल 64 केस दर्ज हुए थे जबकि इस साल अब तक 99 केस दर्ज हो चुके हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि महिलाएं अपराध को लेकर जागरूक हो रही हैं और खुलकर सामने आकर शिकायतें दे रही हैं।
महिला विरुद्ध अपराधों में दो साल में नहीं आई कमी
अपराध 2020 में दर्ज मामले 2021 में अब तक
छेड़छाड़ 50 45
दुष्कर्म 29 34
दहेज 64 99
महिलाएं उत्पीड़न को लेकर यहां कर सकती है शिकायत
महिलाएं उत्पीड़न को लेकर महिला हेल्प लाइन 1091 पर मदद ले सकती है। इसके अलावा डायल 112 पर भी मदद मिलेगी। दुर्गा शक्ति एप पर भी महिलाएं शिकायत दे सकती हैं, तुरंत टीम समाधान के लिए मौके पर पहुंचेगी। इसके अलावा महिला थाना में आकर भी महिलाएं शिकायत दे सकती हैं। पीड़ित महिलाएं बेझिझक होकर महिला पुलिस कर्मचारियों को अपनी समस्या से अवगत करवा सकती हैं।
केस एक
नाबालिग साथ दुष्कर्म के दोषियों को कोर्ट सुना चुका है 20 साल की सजा
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने एक फरवरी 2021 नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले की सुनवाई करते हुए दोषी दो युवकों को 20-20 साल की सजा सुनाई थी। आरोपियों के खिलाफ 25 मार्च 2017 को टोहाना में मामला दर्ज हुआ था।
केस दो
युवती के साथ दुष्कर्म मामले में डॉक्टर को हो चुकी सजा
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने एक सितंबर को युवती के साथ दुष्कर्म मामले में एक डॉक्टर को साढे़ पांच साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। उपचार करवाने आई युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप था।
कोट
महिलाओं को शिक्षित करना सबसे जरूरी : मनोचिकित्सक
महिलाएं ओपीडी में चिंता रहना, नींद न आना, सोचते रहना आदि बीमारी लेकर आ रही हैं। अधिकतर केस ऐसे सामने आते हैं जिसमें महिलाएं शादी के बाद परिवार में समायोजन नहीं कर पाती हैं और छोटी-छोटी बातों पर स्ट्रेस ले लेती है और धीरे-धीरे बीमारी गंभीर हो जाती है। महिलाओं का शिक्षित होना सबसे जरूरी है और दूसरा शादी के लिए कम से कम उम्र 24 से 25 साल होनी चाहिए। महिला अगर शिक्षित होगी तो वह खुद को स्वस्थ रख पाएगी साथ ही खुद के पैरों पर भी खड़ी हो सकती हैं।
- डॉ. गिरिश, मनोचिकित्सक, नागरिक अस्पताल
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सजग : एसपी
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फतेहाबाद पुलिस पूरी तरह सजग है। स्कूल, कॉलेज, घर, ऑफिस या शहर, बाजार जाते समय अगर किसी महिला को असुरक्षा महसूस हो तो वह तुरंत इस बारे पुलिस को सूचना दे। पुलिस तुरंत उसकी सहायता के लिए मौके पर पहुंचेगी। महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों को रोकना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जिला पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य है।
- सुरेंद्र कुमार भोरिया, पुलिस अधीक्षक