फतेहाबाद। हिसार के 30 वाहनों का फर्जी तरीके से फतेहाबाद में पंजीकरण करवाने का मामला प्रशासन दबाने की कोशिश में लगा है। इस केस को जहां मुख्यमंत्री कार्यालय गंभीर अपराध मान रहा है, वहीं एसडीएम कार्यालय लिपिकीय गलती मानकर निपटाने में लगा हुआ है। दो साल से कभी एसडीएम, कभी डीसी तो कभी सीएम विंडो मुख्यालय के लॉग-इन में घूम रहे इस केस की मुख्यमंत्री कार्यालय और डीसी तक ने क्रिमिनल प्रोसिडिंग चलाने के निर्देश दिए। मगर एसडीएम कार्यालय ने तो शिकायत को दफ्तर दाखिल करने की ही अनुशंसा कर दी है।
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने 21 सितंबर 2020 को एटीआर मांगी थी, लेकिन डिस्ट्रिक अटॉर्नी की राय लेने की बात कहकर एसडीएम कार्यालय ने डेढ़ साल तक मामले को लटकाए रखा। दरअसल, 20 जनवरी 2020 को सीएम विंडो पर हिसार की संस्था जवाब दो-हिसाब दो एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सरदाना ने शिकायत लगाई थी। आरोप था कि साल 2012 में पारिवारिक विवाद के कारण हिसार की एजेंसी बिमला ऑटो मोबाइल को प्रशासन ने सील कर दिया था। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि 31 मार्च 2017 के बाद बीएस-टू व बीएस-थ्री वाहनों को बेचा नहीं जा सकेगा। आरोप है कि पांच साल पुराने वाहनों को ठिकाने लगाने के इरादे से एजेंसी मालिक व छह अन्य लोगों ने मिलकर इन सभी वाहनों को बीएस-4 बनाकर बेच दिया और इन सभी का पंजीकरण फतेहाबाद एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों से साठगांठ करके करवा लिया। संवाद
पुलिस रिपोर्ट व डीए की राय लेने के बाद यह दी गई दलील
एसडीएम कार्यालय ने रिपोर्ट में कहा है कि पुलिस विभाग से प्राप्त जांच रिपोर्ट में कोई संज्ञेय अपराध नहीं पाया गया है और न ही पंजीकृत वाहनों के बिल फर्जी होने की पुष्टि हुई है। पुलिस रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि वाहनों का पंजीकरण उनके निर्माण वर्ष को गलत दर्शाकर पंजीकृत करवाया गया है। इसकी जांच के लिए उपतहसीलदार की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई। गठित जांच कमेटी के अनुसार शिकायत में वर्णित वाहनों को कार्यालय में पंजीकृत वाहनों का पंजीकरण तत्कालीन मोटर वाहन पंजीकरण अधिकारी द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इसलिए रिपोर्ट फाइनल कर दी गई। मगर मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जिला न्यायवादी से कानूनी राय ली गई। एसडीएम कार्यालय का दावा है कि जिला न्यायवादी ने यह माना है कि पंजीकृत वाहनों का निरस्तीकरण हो चुका है। गलत आवेदन पत्रों के आधार पर वाहन पंजीकरण करवाने वाले आवेदनकर्ताओं के खिलाफ सक्षम अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करें।
फरवरी 2020 में फर्जीवाड़ा सामने आते ही रद्द कर दी थी आरसी
आरोप था कि एजेंसी मालिक व कर्मचारियों ने मिलीभगत से 30 वाहनों को पंजीकृत करवाया था। इनमें 21 स्कूटर, छह 20 सीटर क्रूजर गाड़ी और चार बसें शामिल थीं। इन सभी वाहनों का 31 जनवरी 2019 और 23 फरवरी 2019 को पांच आदमियों के नाम पंजीकरण करवाया गया। उसके बाद इन वाहनों को आगे बेच दिया गया है। इनमें से छह क्रूजर भिवानी के राकेश के नाम रजिस्टर्ड है, जो आज भी भिवानी में चल रही हैं। सीएम विंडो पर शिकायत के बाद तत्कालीन एसडीएम संजय बिश्नोई ने फरवरी 2020 में इन वाहनों की आरसी रद्द कर दी थी।
चार महीने बाद डीए की रिपोर्ट के साथ जमा की एटीआर
एसडीएम कार्यालय को 30 सितंबर 2021 को जिला न्यायवादी (डीए) का ओपिनियन लेने के निर्देश दिए गए थे। इस प्रक्रिया में भी अधिकारियों ने करीब चार महीने का समय लगा दिया। बार-बार मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा डीए की रिपोर्ट मांगी गई। चार महीने के बाद 31 जनवरी को डीए की रिपोर्ट के साथ एसडीएम कार्यालय ने अपनी एटीआर जमा करवाई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने अब यह कहा...
मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिकायत को लेकर कहा है कि पंजीकरण प्राधिकारी के समक्ष अपने वाहनों के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले मालिकों के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की गई। यह पंजीकरण प्राधिकरण को धोखा देने का एक गंभीर अपराध है। इसलिए कानूनन कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोट
यह मामला पूरी तरह आपराधिक है। आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। मगर एसडीएम कार्यालय के अधिकारी व कर्मचारी दोषियों को बचाने में लगे हुए हैं।
-राजीव सरदाना, शिकायतकर्ता
-सीएम विंडो पर करीब 250 शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं। किसी एक शिकायत के संबंध में मैं कैसे बता पाऊंगा। कार्यदिवस पर कार्यालय में फाइल देखकर जानकारी दे पाऊंगा।
-प्रदीप कुमार, डीसी, फतेहाबाद