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धांगड़, बड़ोपल व काजलहेड़ी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दरकार

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गांव काजलहेड़ी के तालाब में मौजूद दुर्लभ प्रजाति के कछुए। - फोटो : Fatehabad
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राष्ट्रीय पर्यटन दिवस विशेष...
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धांगड़, बड़ोपल व काजलहेड़ी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दरकार
गांव धांगड़ में बणी, बड़ोपल में अभ्यारणय और काजलहेड़ी में हेड पर हैं संभावनाएं
कपिल शर्मा
फतेहाबाद। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर बसे वन्य जीवों का संरक्षण करने वाले तीन गांवों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दरकार है। पर्यटन की अपार संभावनाएं वाले इन गांवों के ग्रामीणों को प्रशासन व सरकार की पहल का इंतजार है। दरअसल, फतेहाबाद शहर से मात्र छह किलोमीटर दूर बसे गांव धांगड़ में 25 एकड़ में बणी है, जो प्राकृतिक सुंदरता का नजारा पेश करती है। इसके बाद बड़ोपल में वन्य प्राणियों के लिए अभ्यारणय बना हुआ है जबकि काजलहेड़ी में हेड बना हुआ है। काजलहेड़ी में ही दुर्लभ प्रजाति के कछुएं भी हैं। ऐसे में शहरवासियों के लिए वीकेंड पर परिवार सहित भ्रमण करने का यह प्रमुख केंद्र बन सकता है। अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा की ओर से भी सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर इन संभावनाएं को अमलीजामा पहनाने की मांग की गई है। (संवाद)
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बड़ोपल में वन्य जीवों के लिए 300 एकड़ में अभ्यारण्य
नेशनल हाईवे पर स्थित गांव बड़ोपल में वन्य जीवों के लिए सरकारी तौर पर 187 एकड़ जमीन अभ्यारण्य के रूप में छोड़ी हुई है। मगर आसपास की जगहों पर भी इन जीवों को कोई नहीं रोकता है। इसलिए करीब 300 एकड़ जगहों में अलग-अलग प्रजाति के हिरण, नील गाय व अन्य वन्य जीव विचरण करते हैं।
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पांच एकड़ में बने तालाब में हैं 400 कछुएं
गांव काजलहेड़ी में पांच एकड़ में बने तालाब में दुर्लभ प्रजाति के करीब 400 कछुएं हैं। इस तालाब में कछुओं को देखने के लिए फतेहाबाद शहर के अलावा आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी लोग परिवार सहित आते हैं। ग्रामीण अपने स्तर पर भी इस जगह को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करवाने में लगे हुए हैं।
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काजलहेड़ी हेड पर दोनों नहरों के बीच है 30 फीट चौड़ाई
भाखड़ा नहर के काजलहेड़ी हेड पर दो नहरें बनी हुई हैं। इन दोनों नहरों के बीच करीब 30 फीट चौड़ी जगह है, यहां 100 फीट लंबाई तक पिकनिक स्पॉट या पर्यटन केंद्र विकसित किया जा सकता है। बहुत से लोग बड़ोपल में काले हिरणों और काजलहेड़ी में कछुओं को देखने आते हैं। ऐसे में झील के रूप में बने काजलहेड़ी हेड पर दोनों नहरों के बीच खाली जगह बैठकर आगंतुक प्राकृतिक नजारे ले सकेंगे।
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:: प्रशासन या सरकार गंभीरता से प्रयास करें तो गांव धांगड़, बड़ोपल व काजलहेड़ी को पूरी तरह पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। बड़ोपल में हिरण व काजलहेड़ी में कछुओं का देखने लोग आते हैं। काजलहेड़ी हेड पर व्यवस्था करने की जरूरत है।
विनोद कड़वासरा, प्रदेशाध्यक्ष, जीव रक्षा बिश्नोई सभा
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