स्वामी नगर से बेटी का उपचार करवाने आए रघुबीर को अस्पताल स्टाफ की बेरुखी का शिकार होना पड़ा। उसकी बेटी तीन घंटे तक बुखार से रोती रही लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
पॉलीक्लीनिक में अपनी बेटी का उपचार करवाने आए रघुबीर ने बताया कि उसकी बेटी मंजू का टायफाइड का पॉलीक्लीनिक में उपचार चल रहा है।
शनिवार रात को उसकी बेटी को घर भेज दिया गया और सुबह बुलाया गया। सुबह सात बजे जब वह अपनी बेटी को लेकर अस्पताल में पहुंचा तो स्टाफ सोया हुआ था।
उसने जब स्टाफ को उठाया तो जवाब मिला कि नया स्टाफ आकर उपचार शुरू करेगा। रघुबीर ने बताया कि इस दौरान तीन घंटे तक उसकी बेटी बुखार के कारण रोती रही। 10 बजे दूसरी स्टाफ नर्स ड्यूटी पर आई और उन्होंने उपचार शुरू किया।
संडे को दो स्टाफ नर्स के सहारे चलती है पॉलीक्लीनिक
करोड़ों रुपये की लागत से बनकर तैयार हुई पॉलीक्लीनिक में भी स्टाफ का टोटा है। यहां एसएमओ सहित 5 पद हैं लेकिन दो खाली पड़े हैं।
संडे के दिन यहां पर सिर्फ दो स्टाफ नर्स ही अस्पताल को संभालती हैं। अस्पताल में लाखों रुपये की नई एक्सरे मशीन भी धूल फांक रही है।
रविवार को छुट्टी होती है जिस कारण से डॉक्टर नहीं आते। मरीज कई बार बीच में उपचार छोड़कर चले जाते हैं जिस कारण से दिक्कत आती है।
डा. प्रीत कौर
एसएमओ पॉलीक्लीनिक