फतेहाबाद। फसली सीजन में धरतीपुत्रों के लिए फसल काटने से लेकर बेचने तक की राह आसान नहीं हो रही है। जिला मुख्यालय की अनाज मंडी हो या दूर-दराज में बने खरीद केंद्र हर जगह अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। सत्ताधारी नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक सिर्फ अच्छी व्यवस्थाओं के कागजी दावे ही कर रहे हैं। खरीद केंद्रों में तो हालात ऐसे हैं कि किसानों के लिए न बैठने की व्यवस्था है और न ही पीने को स्वच्छ पानी है। 40 फीसदी खरीद केंद्रों में तो शौचालय की व्यवस्था ही नहीं है।
गौरतलब है कि प्रशासन द्वारा गेहूं की खरीद के लिए जिले में 44 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा सात अनाज मंडियों में भी खरीद हो रही है। करीब 20 फीसदी खरीद केंद्रों में ही पर्याप्त सुविधाएं हैं। बाकी राम भरोसे चल रहे हैं। दरअसल, खाद्य एवं पूर्ति विभाग की ओर से खरीद एजेंसियों से लेकर मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों तक को फसली सीजन शुरू होने से एक महीने पहले ही मंडियों व खरीद केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश मिल जाते हैं। जिला स्तर से हर मार्केट कमेटी में निर्देश जाते हैं। मगर मार्केट कमेटी के अधिकारी लीपापोती करके काम चला देते हैं। पूरे फसली सीजन के दौरान किसान खामियों से जूझते हुए फसल बेचकर चले जाते हैं। हर बार ढाक के तीन पात जैसी स्थिति ही मिलती है। संवाद
केस नंबर 1
गांव नन्हेड़ी के खरीद केंद्र पर 11070 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। मगर उठान कार्य रविवार को ही शुरू किया गया है। किसान विक्रम सिंह, तरसेम कुमार, मनजीत सिंह ने बताया कि इस खरीद केंद्र पर फसल लेकर आने वाले किसानों के लिए भीषण गर्मी में न बैठने का कोई प्रबंध हैं और न ही बिजली या शौचालय की कोई व्यवस्था की गई है। चिलचिलाती गर्मी में तपती बोरियों पर ही बैठना पड़ता है। हालांकि, पानी की बड़ी टंकी है, जिससे पेयजल की व्यवस्था की जा रही है।
केस नंबर 2
गांव ठरवा के खरीद केंद्र पर भी बदहाल स्थिति है। किसानों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। किसान अनूप कुमार व सुनील कुमार बताते हैं कि इस खरीद केंद्र पर फसल लेकर आने वाले किसान खेतों में लगे हैंडपंपों का खराब पानी पीकर गुजारा कर रहे हैं। न ही बिजली व शौचालय की कोई व्यवस्था की गई है। गेहूं की खरीद होने के बाद एक सप्ताह तक भी उठान नहीं हो पाया है।
केस नंबर 3
गांव पीलीमंदोरी के खरीद केंद्र पर भी खुले आसमान के नीचे ही खरीद हो रही है। यहां भी किसानों के बैठने के लिए कोई प्रबंध नहीं हैं। अभी भी इस खरीद केंद्र पर 10488 क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। किसान संदीप कुमार ने बताया कि खरीद केंद्र पर शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। इस खरीद केंद्र पर अब तक 26475 क्विंटल गेहूं खरीदी गई है। इसमें से 15987 क्विंटल का उठान हो गया है।
केस नंबर 4
गांव नांगला में गेहूं खरीद केंद्र पर खुले आसमान के नीचे खरीद हो रही है। खरीद केंद्र में पीने के पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। खरीद केंद्र पर महिलाएं पानी बेचने आती हैं, उनसे खरीद कर किसान पानी पी रहे हैं। किसानों के बैठने के लिए भी बेहतर सुविधा नहीं है, केवल एक छोटा सा शेड है, जिसके नीचे भीड़ रहती है। गर्मी व धूप से बचने के लिए किसान बोरियों पर ही कपड़े से छतरी बनाकर बैठते हैं। किसान अतर सिंह, रत्न शर्मा, जगदीश व अमरीक सिंह ने बताया कि खरीद केंद्र के चारों तरफ बनी दीवार जगह-जगह से टूटी हुई है, इस कारण केंद्र में पशु आते है व गेहूं को नुकसान पहुंचाते हैंं। केंद्र में शौचालय की कोई सुविधा नहीं है।
केस नंबर 5
गांव हसंगा के खरीद केंद्र पर कच्ची जगह पर ही किसानों को गेहूं डालनी पड़ रही है। इससे काफी गेहूं खराब हो जाती है। यहां दिन में बिजली के लिए जनरेटर की सुविधा तो है, लेकिन पानी की टंकी की खस्ता हालत है। तीन अस्थायी शौचालय बनाए हुए हैं। किसान ओमप्रकाश व विकास कुमार बताते हैं कि खरीद केंद्र के फर्श को पक्का करवाया जाना चाहिए ताकि गेहूं खराब होने का डर न रहे।
जिले में अब तक 621260 क्विंटल गेहूं का हो चुका उठान
जिले में रविवार को 264780 क्विंटल गेहूं का उठान किया गया है। जिले में अब तक खरीदी गई 2245810 क्विंटल गेहूं में से 621260 क्विंटल गेहूं का उठान हो चुका है। हालांकि, अभी भी आढ़तियों की ओर से गेहूं के उठान में और तेजी लाने की मांग की गई है। कई खरीद केंद्रों पर भी एक सप्ताह बाद उठान करवाया गया।
कोट
टोहाना के सभी खरीद केंद्रों पर मैं खुद जाकर आया हूं। नायब तहसीलदार व अन्य अधिकारी भी लगातार जा रहे हैं। उठान में अब तेजी आ गई है। मगर किसी भी समस्या को लेकर शिकायत मेरे पास नहीं आई है। फिर भी दोबारा जांच करवाएंगे। किसानों को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी।
-प्रतीक हुड्डा, एसडीएम, टोहाना
कोट
खरीद केंद्रों पर बिजली, पानी, शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए किसान जूझ रहे हैं। प्रशासन हर बार सिर्फ कागजी दावे करता है। मगर धरातल पर कभी भी बेहतर प्रबंध नहीं मिलते हैं जबकि तैयारियां शुरू करने के निर्देश एक महीने पहले ही मिल जाते हैं। सत्ताधारी पार्टियों के नेता तो सिर्फ मंडियों में फोटो खिंचवाने जाते हैं।
-संदीप काजला, प्रधान, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी)
कोट
अगर किसी खरीद केंद्र पर सुविधाएं पूरी नहीं है, तो चेक करवा लेते हैं। जिस भी सुविधा की जरूरत होगी, वह कर्मचारियों को निर्देश देकर पूरी करवाई जाएगी। किसानों को किसी तरह की समस्या नहीं आने दी जाएगी।
-राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद