टोहाना। वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते लोगों के पास अपने परिवार को देने के लिए समय नहीं होता, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो परिवार के साथ दूसरे लोगों को भी साथ लेकर चलने का साहस रखते हैं। शास्त्री नगर की रहने वाली नेहा वर्मा इसका उदाहरण हैं।
नेहा वर्मा दिव्यांग व जरूरतमंद बेटियों के उत्थान के लिए पिछले लंबे समय से कार्य रही हैं। नेहा करीब तीन वर्षों से संगम मंदबुद्धि बाल केंद्र में दिव्यांग बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रही हैं, वहीं करीब एक साल पहले अपूर्वा फाउंडेशन नामक संस्था का गठन कर वे दिव्यांग व जरूरतमंद बेटियों को निराशा के भंवर से निकालकर उनके लिए नई उम्मीद बनी हुई हैं। संवाद
दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षित करने का किया कोर्स
शास्त्री नगर की रहने वाली नेहा वर्मा के पति नीनू वर्मा ज्वेलरी शॉप चलाते हैं। नेहा के अनुसार उसने ओटीज्म, मेंटल रेटरडेशन एंव वोकेशनल एजुकेशन की है। नेहा वर्मा मध्यप्रदेश के जबलपुर की रहने वाली हैं और जबलपुर व भोपाल में एक मदर टीचर के तौर अपनी सेवाएं प्रदान दे चुकी है। नेहा के अनुसार उन्होंने दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षित करने का कोर्स किया, टोहाना में रहते हुए दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षित करने के लिए जहां संगम मंदबुद्धि बाल केंद्र में स्पेशल एजुकेटर के तौर पर निशुल्क सेवाएं प्रदान कर रही हैं। नेहा के प्रयासों के चलते शहर के अनेक समाजसेवी गणमान्य अपना जन्मदिन व खुशी का पल दिव्यांग बच्चों के साथ आकर मनाते हैं, ताकि बच्चों के चेहरे सदा खिल खिलाते रहे।
विशेष बच्चों से लगाव रखती हैं नेहा
नेहा वर्मा ने बताया कि उनके परिवार में भी एक विशेष बच्चा है, जिसके चलते वे ऐसे माता-पिता के दुख-दर्द को समझा सकती हैं। नेहा को बचपन से ही ऐसे बच्चों के साथ लगाव रहा है। नेहा ने बताया कि अक्सर दिव्यांग बेटियां घर में ही कैद होकर रह जाती हैं और परिवार के सदस्य भी ऐसी बेटियों को भय के चलते स्कूलों में नहीं भेज पाते। इन सब पर विचार करने के बाद उसने अपूर्वा फाउंडेशन का गठन किया, ताकि दिव्यांग बेटियां सुरक्षित रहकर अपने उत्थान के लिए आगे बढ़ सकें। दिव्यांग बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करते हुए शिक्षा ग्रहण करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सके। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था द्वारा आस-पास के गांव में कैंप लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है तथा दिव्यांग बेटियों को गांव में जाकर शिक्षित किया जाता है, जिन्हें होमवर्क भी दिया जाता है।
उन्हें किसी के सहारे की जरूरत न अनुभव हो
नेहा वर्मा ने बताया कि अपूर्वा संगठन के बनने के बाद माता-पिता के मन में बेटियों को लेकर जो भय था वह काफी हद तक दूर हुआ है, जिसके चलते ऐसे बच्चों के जीवन में भी सुधार देखने को मिलता है। वर्मा ने बताया कि उन्होंने बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा, योगा, कराटे, डांस, आर्ट एंड क्राफ्ट, बॉक्सिग, म्यूजिक आदि गतिविधियां करवाना शुरू कर दिया है, ताकि उनका शारीरिक व मानसिक विकास हो सके। नेहा ने बताया कि उनके पास 35 दिव्यांग व 10 जरूरतमंद बेटियां हैं, जिसमें दो ऐसी दिव्यांग बेटियां भी शिक्षिका के रूप में सेवाएं देकर संगठन का पूर्ण सहयोग कर रही है। वर्मा ने बताया कि वह 300 से अधिक दिव्यांग बच्चों को शिक्षा दे चुकी है।
दीपावली पर सुंदर रंगोली व दीए बनाते हैं बच्चे
नेहा वर्मा ने बताया कि दिव्यांग बच्चों को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए वे लगातार गतिविधियां करवाती रहती हैं, ताकि बच्चों में छिपी प्रतिभा सामने आ सके। दीपावली के त्यौहार के समय बच्चों द्वारा सुंदर-सुंदर रंगोली बनाई जाती हैं व दीए बनाए जाते हैं। दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाए दियों व रंगोली को देखने के लिए शहर के गणमान्य लोग आते है जो उनके कार्यो की सराहना करते है जिससे बच्चों का हौसला बढ़ता है।
स्पीच थेरेपी सेंटर खोल दिया है
नेहा वर्मा ने बताया कि ऐसे बच्चों को स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए वे हिसार जाती थीं जहां खर्च भी अधिक हो जाता है। ऐसे में उन्होंने स्पीच थेरेपी सेंटर की शुरूआत की है ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ मानसिक विकास हो सके। स्पीच थेरेपी के बाद बच्चे बोलना, पहचानना व ध्यान लगाना सीख जाते हैं। उन्होंने बताया कि वोकेशनल कोर्स के चलते वे बच्चों को सिलाई केंद्र में मास्क व रुमाल बनाना सिखा रहीं हैं, जिनको बेचकर जो राशि आती है वो बच्चों पर खर्च की जाती है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से अभी तक उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल पाया है, शहर के गणमान्य लोग समय-समय पर आकर संस्था को सहयोग करते हैं, जिससे उनका हौसला बढ़ता है। उन्होंने बताया कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिव्यांग बच्चियों को पढ़ाने के लिए टीचर लगाया है, जो बीए पास हैं।
दिव्यांग छात्राओं को दीया मेकिंग व रंगोली बनाना सिखाती नेहा वर्मा- फोटो : Fatehabad