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230 में से सिर्फ 20 सरकारी स्कूलों में लैब, कैसे गणित के माहिर बने विद्यार्थी

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फतेहाबाद के सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों को गणित पढ़ातीं शिक्षका। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। गणित में विद्यार्थियों की नींव मजबूत न होने के कारण दसवीं कक्षा के परिणामों में विद्यार्थी पिछड़ रहे है। ये ही कारण है कि गणित का परिणाम 35 से 40 फीसदी तक रह रहा है। ये ही नहीं अधिकतर स्कूलों में विद्यार्थियों को गणित का सिलेबस बिना प्रेक्टिकल के करवाया जा रहा है। ब्लैकबोर्ड पर समझाकर खानापूर्ति की जा रही है। शिक्षा विभाग के आंकड़े खुद ये ब्यां कर रहे हैं। जिले में छठी से बारहवंी तक के 230 सरकारी स्कूलों में से मात्र 20 में ही मैथ लैब है।
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जबकि प्रत्येक स्कूल में साइंस की मैथ लैब होनी चाहिए। जो 20 लैब चल रही है, वह भी स्कूलों ने अपने स्तर पर स्थापित कर रखी है। जिला शिक्षा विभाग ने मुख्यालय से प्रत्येक स्कूल में मैथ लैब की डिमांड भेज रखी है लेकिन ये मांग अभी तक अधूरी है।
ग्रामीण स्कूलों में एक तो शहरी स्कूलों में तीन-तीन शिक्षक :
गणित के अगर शिक्षकों की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में एक-एक शिक्षक है और शहरी क्षेत्र के स्कूलों में तीन-तीन पद है।
रट्टा लगवाने से गणित नहीं समझ रहे विद्यार्थी :
जिला गणित विशेषज्ञ रमेश कुमार का कहना है कि गणित को एक्टिविटी के जरिये अगर विद्यार्थी को समझाया जाए तो उसे वह नहीं भूलता। कमजोरी का कारण ये है कि छोटी कक्षा में विद्यार्थी गणित को नहीं समझते है। ये ही कारण है दसवीं कक्षा में जाकर दिक्कत आती है। अगर नीचे विद्यार्थी का बेस सही है तो हाई कक्षाओं में विद्यार्थी को गणित को समझने में दिक्कत नहीं आती है।
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छठी से बारहवीं कक्षा तक ये है विद्यार्थियों की संख्या :
कक्षा विद्यार्थी
छठी 10870
सातवीं 10106
आठवीं 10247
नौवीं 11299
दसवीं 9796
ग्याहरवीं 8365
बारहवीं 7315
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गणित में अभ्यास पर फोकस किया जाए और फार्मूला पर अभ्यास करवाया जाए। ब्लैकबोर्ड पर करने की जगह शिक्षक सेल्फ प्रेक्टिस करवाए। मैथ को रुचि लेकर पढ़ा जाए। बच्चे को ये बताया जाए कि गणित याद करने की चीज नहीं समझने की चीज है। बच्चे को उत्साहित किया जाए कि अपने अलग फार्मूला तैयार करके एक सवाल को अलग-अलग तरीके से निकाल कर देखे।
- सनील राईका, भिरड़ाना, विशेषज्ञ
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गणित को कभी रट्टा नहीं लगाना चाहिए, इसे प्रेक्टिकल की तरह समझना चाहिए, इससे जल्द समझा भी आती है और छात्र भूलता भी नहीं है। जिले में फिलहाल 20 मैथ लैब चल रही है हालांकि मैथ कार्नर बनाए गए है। मैथ लैब के लिए निदेशालय में डिमांड भेजी गई है। विद्यार्थियों में गणित के प्रति रूझान लाने के लिए क्विज प्रतियोगिताएं, प्रदर्शनी मॉडल कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।
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- रमेश कुमार, जिला गणित विशेषज्ञ
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फोटो नंबर 21
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