फतेहाबाद के प्राइमरी स्कूल में टूंटी जहां विद्यार्थी हाथ धोते हैं।
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फतेहाबाद। स्कूलों में विद्यार्थियों को सबसे पहला पाठ स्वच्छता का पढ़ाया जाता है। इसमें शुरूआत हाथ धोने से होती है। विद्यार्थियों को ये भी समझाया जाता है कि उन्हें कब-कब हाथ धोने जरूरी होते है। लेकिन जहां विद्यार्थियों को ये पाठ पढ़ाया जाता है वहां पर साबुन ही नहीं है। शिक्षा विभाग स्कूलों को प्रति विद्यार्थी मात्र ढाई रुपये प्रति साल साबुन खरीदने के लिए दे रहा है।
शिक्षा विभाग ने 2017 में साबुन खरीदने के लिए स्कूलों को बजट जारी किया था। इसके बाद कोरोना महामारी की शुरूआत में स्कूलों को बजट जारी हुआ लेकिन इसके बाद स्कूलों को साबुन खरीदने के लिए बजट नहीं मिला। अब हालात ये हैं कि स्कूलों के वॉशविसिन न से साबुन ही गायब है। यहां तक के शौचालयों के बाहर बने वॉशविसिन पर भी साबुन नहीं है।
कहीं वॉशविसिन ही नहीं जहां है वहां साबुन नहीं
ग्लोबल हैंडवाशिंग डे को लेकर स्कूलों की पड़ताल की तो सामने आया कि अधिकतर में वॉशविसिन पर साबुन ही नहीं है। इसके अलावा जहां वॉशविसिन है वहां साबुन नहीं है। फतेहाबाद के खंड कार्यालय के पास बने प्राइमरी स्कूल में वॉशविसिन शौचालय के अंदर है, लेकिन उसको ताला लगा मिला। इसके अलावा पानी की टंकी के पास भी साबुन नहीं मिला। इसके अलावा मॉडल संस्कृति स्कूल में भी एक ही वॉशविसिन पर साबुन मिला।
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शिक्षा विभाग स्कूलों को साबुन के लिए एक साल में मात्र ढाई रुपये प्रति विद्यार्थी साबुन देता है। विभाग के उच्च अधिकारी बताएं कि क्या विद्यार्थी पूरे साल में ढाई रुपये का साबुन इस्तेमाल करता है और ढाई रुपये में एक साबुन भी नहीं आता है। विभाग बजट जारी करने को लेकर औपचारिकता न करें।
- देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।
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शिक्षा विभाग की तरफ से समय-समय पर बजट जारी किया जाता है। इसके अलावा विद्यार्थियों को जागरूक भी किया जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद इसे जरूरी कर दिया है।
- दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी।