हरियाणा विधानसभा में सोमवार को पेश किए गए आम बजट को नेताओं ने लोकलुभावना और आम मध्यवर्गीय लोगों खासकर महिलाओं ने निराशाजनक बताया है। अमर उजाला से बातचीत में लोगों ने कहा कि बजट में पिछले वर्ष की तरह अब भी घोषणाएं की गई हैं, जबकि बजट में यह नहीं बताया गया कि घोषणाएं पूरी कैसे होंगी। कई घोषणाएं ऐसी हैं जिसके लिए बजट में पैसे का प्रावधान नहीं रखा गया।
विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि सरकार ने बजट को कर रहित बताया है, जबकि पिछली बार बजट के बाद बिजली के दाम तीन बार बढ़ाए गए। इस बार भी ऐसा ही होने वाला है। मेडिकल कॉलेज के लिए पैसा का प्रावधान नहीं रखा गया। किसानों ने के लिए स्वामीनाथन आयोग, कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग का कहीं जिक्र नहीं है। भूना में सीनियर सेेेेेेकेंडरी स्कूल में चल रहे सरकारी कॉलेज के भवन का भी जिक्र नहीं किया गया।
पूर्व कांग्रेस सीपीएस प्रहलाद सिंह ने कहा कि सरकार ने पिछली बारी भी बजट में घोषणाएं की थी वो अब तक पूरी नहीं हो सकी। व्यापारी वर्ग के बजट निराशाजनक है। किसानों के लिए भी पैसे का प्रावधान नहीं रखा गया। युवाओं को रोजगार के मुद्दे पर वित्त मंत्री चुप्पी साध गए। उद्योग धंधों के लिए कोई सुस्पष्ट नीति नजर नहीं आई।
पूर्व सीपीएस हजकां नेता दुड़ाराम ने कहा कि बजट में घाटा यह दर्शा रहा है कि प्रदेशवासियों पर कर्ज दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। छोटे किसान मजदूर व व्यापारियों के लिए बजट में जिक्र तक नहीं आया। सरकार का यह दावा झूठा है कि यह कर रहित बजट है।
बजट जनहित को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी प्रकार का भी टैक्स का बोझ प्रदेशवासियों पर नहीं थोपा गया। खासकर आंदोलन पीड़ितों के लिए बजट में प्रावधान है। शिक्षा व स्वास्थ्य पर खर्च का प्रावधान बजट में किया गया। सरकार ने सभी वर्गो को ध्यान में रखकर बजट प्रस्तुत किया है।
भारत भूषण मिढ़ा, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा
बढ़ती महंगाई पर सरकार कैसे नकेल कसेगी, इसका बजट में जिक्र नहीं है। रसोई की वस्तुओं के दाम आसमान पर हैं। दालें 100 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही हैं। जबकि ये ही दाल किसानों से आधे दामों पर खरीदी जा रही है। बजट में प्रदेश वासियों के लिए कुछ नहीं है। -पूजा रानी, गृहिणी
बजट में आम आदमी के लिए कुछ खास नहीं दिया गया है। महंगाई के चलते रसोई का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। सरकार को महंगाई पर रोक लगाने के लिए नीति बनानी चाहिए थी, जो इस बजट में कहीं नजर नहीं आई। सोमा देवी गृहणि
बाजार में मंदी है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से किराए में बढ़ोतरी होना लाजमी है। सरकार को व्यापारियों के लिए खासकर छोटे व मझले दुकानदारों के लिए रियायती दरों पर ऋण व पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी। बजट में दुकानदोरां के लिए कुछ नहीं है। -मदन लाल, हैंडलूम दुकानदार
फतेहाबाद जिला उद्योग के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। बजट में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किसी प्रकार की घोषणा नहीं की गई है। उद्योग लगने से ही फतेहाबाद विकास के क्षेत्र में आगे जा सकता है। -साहिल असीजा, इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार
प्रदेश की सरकारी जमीनों पर कब्जा छुड़वाकर उस जमीन को जनहित के प्रयोग में लाने की घोषणा बजट में पहली बार हुई है। अगर सरकार पंचायती व गोचर जमीनों पर कब्जे छुड़वाकर कल्याणकारी योजनाएं चलाती हैं या गोशालाएं बनवाती हैं तो यह प्रदेश का सबसे बड़ा काम होगा। -डॉ. विरेन्द्र सिवाच, भाजपा नेता
यह बजट किसानों का नहीं कहा जा सकता। बजट में स्वामीनाथन आयोग, ओलावृष्टि से खराब हुई गेंहू, सफेद मक्खी से खराब हुई नरमे की फसल का मुआवजा पांच एकड़ से कम जमींदारों को देने का कहीं जिक्र नहीं है। भाजपा के घोषणापत्र में किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट को लागू करना था। अब भाजपा इसे भूलाना चाहती है। यह बजट पूंजीपतियां को बजट कहा जा सकता है। -कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया, किसान नेता