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Fatehabad News: रतिया में पूर्व सांसद और पूर्व विधायक में आमने-सामने का मुकाबला

Fri, 27 Sep 2024 09:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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कपिल शर्मा
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फतेहाबाद/रतिया। पंजाब सीमा के साथ लगती फतेहाबाद जिले की एकमात्र अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट रतिया में पूर्व सांसद और पूर्व विधायक में सीधा मुकाबला है। यहां पर साल 2019 में भाजपा ने 57 साल में पहली बार जीत दर्ज की थी। भाजपा ने इस बार पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल तो कांग्रेस ने पूर्व विधायक जरनैल सिंह को मैदान में उतारा हुआ है। इनेलो से पूर्व खेल मंत्री रामस्वरूप रामा, आम आदमी पार्टी से भाजपा छोड़कर आए मुख्तयार बाजीगर व जजपा से वेल्डिंग मिस्त्री रमेश ओड को प्रत्याशी बनाया गया है।
सुनीता दुग्गल को प्रत्याशी बनाते ही भाजपा में बगावत की लहर चल पड़ी। पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा भाजपा छोड़ गए। उनके साथ कई और पदाधिकारी भी भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। इस सीट पर किसान संगठनों की नाराजगी भी सबसे बड़ा फैक्टर है। कांग्रेस इसे भुनाने में लगी है। इस कारण सुनीता दुग्गल को बाहरी विरोधियों के साथ-साथ पार्टी के अंदरूनी विरोधियों से भी नुकसान की आशंका है। हालांकि, भाजपा ने नामांकन वापसी के दिन तीन निर्दलीय प्रत्याशियों बीबो इंदौरा, मंजू बाजीगर व छिंद्रपाल को पार्टी में शामिल करवा कर मजबूती बनाने का प्रयास किया है।
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किसान संगठन कर रहे जवाब तलब
रतिया क्षेत्र में किसान संगठनों के साथ-साथ मजदूर संगठन भी काफी सक्रिय हैं। भाजपा प्रत्याशी सुनीता दुग्गल को गांवों के दौरे के दौरान इन संगठनों के सवालों की बौछारों का सामना करना पड़ रहा है। किसान संगठनों के सदस्य किसान आंदोलन जबकि मजदूर संगठनों के सदस्य महंगाई, बेरोजगारी, मनरेगा के बजट की कमी, मजदूरों को आ रही समस्याओं को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। सांसद रहते हुए भी सुनीता दुग्गल रतिया क्षेत्र में कोई ज्यादा प्रभावी प्रोजेक्ट नहीं ला पाई। इस कारण भी उनको लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है। हालांकि, वह पंजाबी भाषा में भी लोगों से संवाद करके उन्हें समझाने का प्रयास करती हैं।


इनेलो का रहा था ज्यादा प्रभाव, कांग्रेस दस साल से जीत को तरसी
रतिया सीट पर लगातार दो बार जीतकर विधायक बनने का रिकॉर्ड सिर्फ इनेलो के ज्ञानचंद ओड के नाम है। ज्ञानचंद के अतिरिक्त पीरचंद और जरनैल सिंह भी दो-दो बार विधायक बने हैं। मगर वह लगातार नहीं जीत सके। पीरचंद को एक बार जीतने के बाद दूसरी बार जीतने में 14 साल लगे जबकि जरनैल सिंह को दूसरी बार विधायक बनने में 11 साल लगे। सबसे बड़ा वोट बैंक अनुसूचित जाति वर्ग का है। 1977 से अब तक यहां 11 चुनाव हो चुके हैं। इनमें से चार बार इनेलो जीती है। तीन बार कांग्रेस, दो बार हरियाणा विकास पार्टी और एक-एक बार जनता पार्टी व भाजपा जीत पाई है। पहले इस सीट पर इनेलो का ज्यादा प्रभाव था, लेकिन अब यह प्रभाव बेहद कम हो चुका है। 2011 के उपचुनाव में आखिरी बार कांग्रेस जीती थी। उसके बाद से कांग्रेस यहां जीत के लिए तरस रही है।


हर बार उठता है घग्गर नदी की सफाई का मुद्दा
रतिया हलके के गांव भूथन कलां निवासी योगेंद्र सिंह कहते हैं कि मनरेगा मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। न ही उन्हें श्रम बोर्ड की योजनाओं का लाभ समय पर दिया जा रहा है।रतिया क्षेत्र में हर बार चुनाव के दौरान घग्गर नदी की सफाई का मुद्दा उठता है। मगर घग्गर नदी की सफाई को लेकर कभी गंभीरता से काम नहीं हो सका है। नागपुर को उपतहसील का दर्जा भी नहीं मिल पाया है। इसके अलावा शहर में हैफेड के गोदाम बने हुए हैं, जहां ट्रकों की आवाजाही अधिक रहती है। इस कारण जाम से लोगों को जूझना पड़ता है। इन गोदामों को शहर से बाहर शिफ्ट करवाने की बार-बार मांग उठती है। मगर अभी तक इस दिशा में काम नहीं हुआ है। वहीं, गांव भिरड़ाना निवासी विजय कुमार कहते हैं कि रतिया इलाके के गांवों में नशा बड़ा मुद्दा है। कई युवा जान गवां चुके हैं। पुलिस प्रयास कर रही है, लेकिन जड़ से नशा खत्म नहीं हो सका है।
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भाजपा ने रतिया विधानसभा क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार किया है। सुनीता दुग्गल सांसद रहते भी कोई एक प्रोजेक्ट रतिया के लिए नहीं ला पाई। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी विकास की जरूरत है। नशे की समस्या बढ़ी है। जनता इस बार पूरी तरह कांग्रेस के साथ है। निश्चित रूप से बड़े अंतर से जीत होगी। - जरनैल सिंह, कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक, रतिया।
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