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भगवान श्रीराम का जीवन आज भी हर नागरिक के लिए प्रेरणादायी : पांडेय

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रतिया। अनाज मंडी स्थित शिव मंदिर में वीरवार से संगीतमयी श्रीराम कथा की शुरुआत की गई। कथावाचक संतोष पांडेय व विपिन पांडेय ने कहा कि भगवान श्रीराम का जन्म असुरों और पापियों का नाश करने के लिए हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने पूरे जीवन काल के दौरान मर्यादा को सर्वोत्तम रखा।
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उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन आज भी हर नागरिक को प्रेरणा देता है। वह आदर्श बेटे, भाई, मित्र रहे। यूं तो रामायण का हर पात्र हमें सामाजिक परंपराओं के लिए प्रेरित करता है। राजा दशरथ का पुत्रों के प्रति प्रेम, भाईयों का आपस में स्नेह, पत्नी का पति के प्रति आदर भाव, मित्र के लिए सर्वस्व बलिदान करने का भाव हमें रामायण में देखने को मिलता है। एक राजा के घर में जन्म लेने के बाद भी महज पिता के वचनों को निभाने के लिए श्रीराम 14 वर्ष के लिए वनों में चले गए।
उन्होंने अपने पिता का मान रखा। वनों में जाकर ऋषि-मुनियों को राक्षसों से मुक्ति दिलाई। श्रीराम ने अयोध्या का राज्य संभालते हुए भी प्रजा को पिता की तरह प्रेम किया। जीवन जीने की कला हमें भगवान श्रीराम का जीवन चरित्र सिखाता है। इंसान को भगवान श्रीराम के दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए मानवता भलाई के कार्यों में अधिक से अधिक योगदान देना चाहिए। कथा का समापन 4 अक्तूबर को होगा। इस मौके पर काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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भगवान की कृपा सब पर बरसती है, जो पात्रों को ही मिल पाती है : राजदास महाराज

भगवान की कृपा सब पर बरसती है, जो पात्रों को ही मिल पाती है : राजदास महाराज

फतेहाबाद। भगवान की कृपा सब पर समान रूप से बरसती है। जो पात्र होते हैं, उन्हें भगवान की कृपा का फल मिलता है जबकि अपात्र वंचित रह जाते हैं। यह बात कैमरी के प्रणामी आश्रम के संचालक संत राजदास महाराज ने अनाज मंडी स्थित हनुमान मंदिर के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कही।


स्वामी राजदास महाराज ने कहा कि भगवान की कृपा पाने में हम में ही कहीं कमी रह जाती है, लेकिन हम उस कमी को दूर करने के बजाय अपनी किस्मत को दोष देना शुरू कर देते हैं। किसी भी देवी देवता की प्रतिमा को देखो तो भगवान खडे़ नजर आएंगे। इसका मतलब है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहते हैं, लेकिन हमारे में ही कोई कमी होती है, जिस कारण हम भगवान की कृपा प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब बारिश होती है तो वो सबके लिए समान होती है। बारिश में दो पात्र एक साथ पड़े होते हैं, एक पात्र तो बारिश के पानी से भर जाता है जबकि दूसरा पात्र खाली रह जाता है। जो पात्र भर जाता है, वह सीधा पड़ा होता है और जो पात्र खाली रह जाता है, वह उल्टा पात्र होता है।



महाराज ने कहा कि इसी तरह ही भगवान की कृपा सब पर समान बरसती है, जो पात्र होता है उसे भगवान की कृपा का फल मिल जाता है जो अपात्र होता है वो भगवान की कृपा से वंचित रह जाता है। इसके लिए हमें अपनी श्रद्धा और भावना को मजबूत करके भगवान की भक्ति करनी होगी ताकि हम भी उसकी कृपा के लिए पात्र बन सके। इस मौके पर भीमसेन असीजा, रामनिवास फौजी, राजकुमार सुरीला, समिति प्रधान भूप सिंह प्रणामी, उपप्रधान होशियार सिंह करणी, संगीता प्रणामी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे।
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