गांव के स्टेडियम में बैठी शीलो देवी, बीरो देवी और सावित्री देवी ने बताया कि उनके मकान उजड़ गए हैं। जिस स्कूल में शरण लिए हुए हैं, उसके प्रिंसिपल ने उनको कहा है कि या तो अपने घर जाओ अन्यथा डीसी से मिलो, क्योंकि स्कूल में अब कक्षाएं लगनी शुरू हो गई हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण उनके घर रहने लायक नहीं है, सभी घरों में गाद भर चुकी है। सड़क पर पांच फुट तक पानी है, ऐसे में वह कैसे यहां रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि खाने-पीने का सामान भी उनको समाजसेवी संस्थाओं की ओर से मिल रहा है। प्रशासन ने सिर्फ उनको रहने की जगह दे रखी है।
टीम यहां से ट्रैक्टर पर सवार होकर इस ढाणी का मुआयना करने पहुंची। यहां पर जो हालात थे, वह काफी खराब हो चुके थे। मेहनत मजदूरी करने वाले हर घर लगभग खराब हो चुके हैं और कभी भी गिर सकते हैं। घरों के बने शौचालय व स्नानघर जमीन में धंस चुके हैं। अभी भी सड़कों पर पांच फुट तक पानी भरा हुआ है। ऐसे में बर्बाद हो चुके अपने घरों को देखने आए लोगों की आंखें भर उठती हैं।
दिल्ली वाली ढाणी में लोगों ने अपने घरों को बचाने के लिए पहले भरसक प्रयास किए थे और घरों के आगे बांध भी बना दिए थे, लेकिन यहां पर बाढ़ का पानी आठ फुट तक पहुंच गया। ऐसे में अब यह बांध दलदल का रूप ले चुके हैं। वीरवार को यहां पर एक युवक जब अपने घर को देखने आया तो वह दलदल में फंस गया, उसे ढाणी के अन्य लोगों ने इस दलदल से बाहर निकाला।
दिल्ली वाली ढाणी की सुनीता देवी ने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया है। उसका बच्चा मात्र 20 दिन का है और बाढ़ के कारण उसे राहत शिविर में आना पड़ा है। बच्चे के लिए दवाओं के प्रबंध नहीं हैं और उसके मुंह पर इंफेक्शन हो गया है।
फतेहाबाद की दिल्ली वाली इस ढाणी में करीब 50 परिवारों के घर हैं। यहां पर अब बर्बादी ही बर्बादी दिखाई दे रही है। अगर एक मकान को पांच लाख रुपये के नुकसान का आंकलन भी किया जाए तो करीब ढाई करोड़ रुपये का नुकसान इन लोगों को हो चुका है। यहां के निवासियों ने बताया कि उनको उभरने में करीब दो साल लग जाएंगे, सरकार को बिना किसी शर्त को उनको मुआवजा देना चाहिए, ताकि वह अपने परिवारों को पाल सकें।
स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट कहा गया है कि शिफ्ट किए गए लोगों को पूरी सुविधाएं देनी हैं। ठहराने से मना भी नहीं करना है। मॉडल संस्कृति स्कूल में ठहरने वालों को इतना जरूर कहा था कि रात को 8 बजे के बाद गेट बंद कर दिए जाएंगे। राहत शिविरों में कहीं किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। -दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद।
कुछ इलाकों में जल स्तर कम हो गया है। अभी फतेहाबाद और रतिया के कुछ गांवों के खेतों में पानी है, जिसे प्रशासन उचित मार्ग से निकाल रहा है।जिन किसानों की फसलों व ढाणियों में नुकसान हुआ है। उनके लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को खोल दिया है। किसान और आम नागरिक इस पोर्टल के माध्यम से नुकसान की रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं। जिन ढाणियों में नुकसान हुआ है, उसका भी मूल्यांकन करवाया जा रहा है। -मनदीप कौर, डीसी, फतेहाबाद।