हरियाणा के फतेहाबाद में किसान आंदोलन के चलते गांव अयाल्की के पास भारतीय किसान यूनियन खेती बचाओ संघर्ष समिति ने शनिवार को धरना स्थगित करते हुए इसे हटा दिया। इससे पहले किसानों की बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि जिले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आगमन पर उनका विरोध किया जाएगा। साथ ही गांवों में वोट मांगने के लिए जजपा व भाजपा का जो भी प्रतिनिधि आएगा, उससे जवाब तलबी की जाएगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंजाब के किसानों द्वारा दिल्ली कूच के ऐलान के बाद 13 फरवरी को रतिया से भारतीय किसान यूनियन खेती बचाओ संघर्ष समिति के किसानों ने दिल्ली के लिए प्रस्थान कर दिया था। प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए गांव अयाल्की के पास रंगोई नाले के पुल पर बैरिकेड्स लगाकर उनको रोक लिया।
इसके बाद किसान यहीं पर पक्का धरना देकर बैठ गए थे। इस बैरिकेडिंग के कारण वाहन चालकों काे भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था और वाहन चालकाें को दूसरे कच्चे व छोटे रास्तों से रतिया जाना पड़ रहा था। हालांकि करीब तीन सप्ताह पहले प्रशासन ने अयाल्की रंगोई पुल से बैरिकेडिंग हटा दिए थे, लेकिन किसान अपने धरने पर बैठे थे। शनिवार को धरना स्थल पर किसानों की बैठक हुई जिसमें खेती बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष जरनैल सिंह मलवाला ने भाग लिया।
इस बैठक में निर्णय लिया गया कि अयाल्की धरने को स्थगित करके यहां से धरना हटाया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सैनी 5 अप्रैल, 7 अप्रैल व 11 अप्रैल को रतिया, टोहाना व फतेहाबाद में आएंगे, जिनका किसान संगठन जोरदार विरोध करेंगे। साथ ही गांवों में जजपा व भाजपा का जो भी प्रतिनिधि आएगा उससे जवाब तलबी की जाएगी। वहीं खनौरी व शंभू बॉर्डर पर किसानों के धरने में संगठन भाग लेता रहेगा।
प्रदेशाध्यक्ष जरनैल सिंह मलवाला ने बताया कि धरने पर बैठने के बजाय अब गांवों में आने वाले सरकार के प्रतिनिधियाें से सवाल किए जाएंगे कि आखिर वह किस मुंह से मत मांगने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव-गांव में भाजपा व जजपा के नेताओं व प्रतिनिधियों का विरोध किया जाएगा।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष राजविंद्र चहल, बेगराज, बंसी सिहाग, राम जाट, सतनाम, सुरेंद्र जाखड़, मदन बिजारणियां व बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।