जिला बने 24 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी भी मुख्यालय कई तमाम जरूरी सुविधाओं से वंचित है। जिले के लोगों को अभी भी कई सुविधाओं के लिए पड़ोसी जिले हिसार और सिरसा पर ही ही निर्भर रहना पड़ रहा है। पीड़ित बच्चों से संबंधित कई सुविधाएं है जो 24 साल बाद भी जिला मुख्यालय को नहीं मिल पाई है। इसमें है चाइल्ड केयर इंस्टीच्यूट और चाइल्ड हेल्प लाइन। जो कि जिला मुख्यालय में उपलब्ध ही नहीं है।
अगर कोई पीड़ित बच्चा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल करता है तो वह मुख्यालय से सीधा जिला अधिकारियों के पास नहीं पहुंचती। पहले शिकायत हिसार या फिर सिरसा जिला मुख्यालय में जा रही है और फिर यहां पर आ रही है। यानि की दो शहरों से होकर जिला मुख्यालय में शिकायत पहुंच पा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीड़ित बच्चों को कितनी जल्दी न्याय मिलता होगा। सप्ताह में जिला मुख्यालय से चार से पांच बच्चे चाइल्ड हेल्प लाइन पर कॉल करते हैं। संवाद
सीसीआई तक नहीं, कहां जाएं बेसहारा बच्चे
0 से 18 साल तक के बेसहारा बच्चों को संरक्षण देने की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। किन्हीं कारणों से बेसहारा हो चुके बच्चों को देखभाल के लिए जगह उपलब्ध करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन जानकर हैरानी होगी कि जिले में चाइल्ड केयर इंस्टीच्यूट ही नहीं है। जिला बाल संरक्षण कार्यालय के सामने ये सबसे बड़ी चुनौती मना हुआ है। इस तरह के मामलों में जिला बाल संरक्षण कार्यालय को बच्चों को वन स्टॉप सेंटर या फिर भिवानी, जींद, सोनीपत, झज्जर के सीसीआई में भेजना पड़ रहा है।
प्रशासन सिरे नहीं चढ़ा रहा योजना
चाइल्ड हेल्प लाइन को लेकर दो से तीन संस्थाओं ने प्रशासन के पास प्रस्ताव भेजा था। लेकिन प्रशासन ने प्रस्ताव को रद्द कर दिया। प्रशासन ने इन प्रस्तावों को ये कह रद्द कर दिया था कि सरकारी एनजीओ को दिया जाएगा। इसके अलावा सीसीआई को लेकर भी अभी तक योजना सिरे नहीं चढ़ी है।
एनजीओ नहीं आ रहे आगे
दो से तीन साल पहले चाइल्ड हेल्प लाइन को लेकर फाइल आई थी, जो कि नियम के मुताबिक नहीं थी। सीसीआई को लेकर कोई एनजीओ आगे नहीं आई है। फिलहाल जो केस होते हैं उन्हें नजदीक के जिले में रेफर किया जा रहा है।
- प्रदीप कुंडू, जिला बाल संरक्षण अधिकारी।
नजदीकी जिलों में भी नहीं है सीसीआई
हिसार-सिरसा और फतेहाबाद तीनों ही जिलों में चाइल्ड केयर इंस्टीच्यूट नहीं है। इसको लेकर बैठक में भी मामला उठाया गया है। मुख्यालय में उच्च अधिकारियों के सामने तीनों जिलों का एक सीसीआई खोलने की मांग रखी जाएगी। अगर तीनों जिलों में एक सीसीआई खुलता है तो भी बहुत फायदा होगा।
- नरेंद्र मोंगा, चेयरमैन, बाल कल्याण समिति।