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Fatehabad News: वर्षों से विकास को तरस रहे जिले के महीनों में बदल रहे मुखिया

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प्रशासनिक उदासीनता के चलते अधूरी पड़ी चिल्ली झील।
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फतेहाबाद। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बीच जिले के मुखिया की कुर्सी खतरे में ही रहती है। यही कारण है कि पिछले चार साल में औसतन हर डीसी सात महीने ही काम कर पाए हैं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। डीसी की बार-बार बदली के कारण बड़े प्रोजेक्ट्स से लेकर विभागीय व अदालती कामकाज भी बाधित हो रहे हैं। शहर का सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चिल्ली झील के सुंदरीकरण का काम भी सिरे नहीं चढ़ पाया है। बाढ़ का संकट झेलने के बाद अभी भी खेतों में भरे पानी की निकासी के कोई उचित प्रबंध नहीं हुए हैं। आठ महीने का समय बीतने के बावजूद मेडिकल कॉलेज की नींव का पत्थर तक नहीं रखा जा सका है। गौरतलब है कि भाजपा-जजपा गठबंधन की नई सरकार बनने के बाद फतेहाबाद में उपायुक्तों का आना जाना लगा हुआ है। कोई भी उपायुक्त लंबे समय तक नहीं रुक पाया है। इन चार सालों में सबसे छोटा कार्यकाल प्रशांत पंवार का रहा है। वह सिर्फ 23 दिन बाद ही बदल दिए गए हैं। संवाद
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अब तक 30 डीसी संभाल चुके जिला
फतेहाबाद को 14 जुलाई 1997 को उपमंडल से जिला घोषित किया गया था। तब से लेकर अब तक 30 डीसी जिले को संभाल चुके हैं। मगर सबसे छोटा कार्यकाल प्रशांत पंवार का ही रहा है। साल 2019 से लेकर अब तक जिले में आठ उपायुक्त आए हैं, लेकिन सिर्फ आईएएस नरहरि सिंह बांगड़ के अलावा कोई भी उपायुक्त अपना एक साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। बाढ़ के कारण शहर से लेकर गांवों की आबादी बचाने के लिए दिन-रात मॉनिटरिंग करने वाली उपायुक्त मनदीप कौर को भी सिर्फ चार महीने में ही बदल दिया गया।

नरहरि सिंह बांगड़ ने चिल्ली प्रोजेक्ट को दी थी रफ्तार
शहर के सबसे जटिल प्रोजेक्ट चिल्ली झील के सुंदरीकरण के लिए तत्कालीन डीसी डॉ. नरहरि सिंह बांगड़ ने रफ्तार दी थी। उन्होंने लगातार बैठकें करके सिंचाई विभाग, जनस्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद का तालमेल बनवा कर काम शुरू करवाया। करोड़ो रुपये भी मंजूर करवाए गए। मगर उनके जाते ही चिल्ली झील का प्रोजेक्ट अधर में लटक गया।
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ये काम हो रहे सबसे अधिक प्रभावित
फतेहाबाद में उपायुक्तों के लगातार हो रहे तबादलों के कारण विभागीय कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। योजनाओं को सिरे चढ़ाने में भी दिक्कत आ रही है। मुख्य रूप से उपायुक्तों के पास जो लोग फरियाद लेकर आते हैं, उनकी शिकायतें उपायुक्त का तबादला होने के बाद फिर से फाइलों में दब जाती हैं। जिस कारण लोग परेशान होते हैं। उपायुक्त अदालत में दीवानी मामलों, राजस्व से संबंधित व सरपंचों के खिलाफ केस आते हैं, यह केस भी लंबे समय तक लंबित रह जाते हैं।

जजपा और भाजपा के बीच फुटबाल बने अधिकारी
जिले में जजपा और भाजपा गठबंधन के नेताओं के बीच अधिकारी फुटबाल बने हुए हैं। सबसे अधिक घमासान टोहाना में मचा रहता है क्योंकि वहां जजपा कोटे से देवेंद्र सिंह बबली सरकार में विकास एवं पंचायत मंत्री हैं। टोहाना से ही भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सरकार में सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो के चेयरमैन हैं। जजपा के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह भी टोहाना से ही हैं। ऐसे में अधिकारियों पर मंत्री व इन नेताओं का कामकाज को लेकर दबाव रहता है।
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चार साल में उपायुक्तों का यह रहा कार्यकाल
उपायुक्त माह
धीरेंद्र खड़गटा 10 माह
रवि प्रकाश गुप्ता 7 माह
नरहरि सिंह बांगड़ 14 माह
महावीर कौशिक 6 माह
प्रदीप कुमार 10 माह
जगदीश शर्मा 9 माह
मनदीप कौर 4 माह
प्रशांत कुमार 23 दिन
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