फतेहाबाद। वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत हुई भर्ती तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सूरजभान कंबोज के लिए आफत बन गई है। इस भर्ती में डॉ. सूरजभान कंबोज पर नियमों को ताक पर रखकर चहेतों की भर्ती करने के आरोप लगे थे। इस प्रकरण में एक वकील ने सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की, जो खारिज हो गई थी। उक्त फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। इस मामले में वीरवार को सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट ने कहा कि डॉ. सूरजभान के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए। डॉ. सूरजभान कंबोज स्वास्थ्य विभाग में निदेशक रह चुके हैं। वह हाल में सेवानिवृत्त हुए हैं।
मामले के अनुसार वर्ष 2013 में एनआरएचएम के तहत जिला स्तर पर कर्मचारी भर्ती किए जाने थे। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने पर आरोप लगा कि तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सूरजभान कंबोज ने नियमावली में छेड़छाड़ करते हुए अपनी सुविधा के अनुसार नियम बना दिए और विज्ञापन जारी कर दिया। उसके आधार पर अपने चहेतों को बतौर कर्मचारी नियुक्त कर दिया। उस भर्ती में आवेदक रहे सुशील कुमार ने सिविल कोर्ट की शरण ली। सिविल कोर्ट ने निर्णय सुनाया कि यह भर्ती गलत तरीके से हुई है और दोबारा होनी चाहिए। यह मामला हाईकोर्ट तक गया, मगर वहां से भी निर्णय सिविल सर्जन के खिलाफ आया। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में लिखा कि सिविल सर्जन ने फर्जीवाड़ा किया है। इस टिप्पणी के आधार पर अधिवक्ता विनोद कुमार ने फतेहाबाद की कोर्ट में अलग से आपराधिक केस दायर कर कहा कि डॉ. सूरजभान कंबोज के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत केस दायर होना चाहिए। मगर सीजेएम कोर्ट ने केस को खारिज कर दिया। सीजेएम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एडवोकेट विनोद कुमार ने सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। खुद ही याचिकाकर्ता के तौर पर पेश हुए। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा कि डॉ. सूरजभान कंबोज ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की है। उन्होंने फर्जी दस्तावेज रचे व आवेदकों को धोखा दिया। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई बनती है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की कोर्ट ने अपने 21 पेज के फैसले में लिखा है कि इस मामले में पर्याप्त दस्तावेज हैं। ऐसे में डॉ. सूरजभान कंबोज के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए। याचिकाकर्ता विनोद कुमार ने बताया कि अब इस मामले में सीजेएम कोर्ट में ही ट्रायल चलेगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को सीजेएम कोर्ट में होगी।