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Fatehabad News: चार माह से एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम बंद, खिलाड़ियों में रोष

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स्टेडियत तैयार होने के बावजूद भी मिट्टी वाले मैदान में अभ्यास करते ​खिलाड़ी। ​खिलाड़ी
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फतेहाबाद। गांव बैजलपुर में अत्याधुनिक एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम का निर्माण कराया गया है। करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से साढ़े चार एकड़ में बने इस स्टेडियम को तैयार हुए चार माह हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इसे खिलाड़ियों के लिए खोलने की अनुमति नहीं दी गई है।
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यह जिले का पहला एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम है, लेकिन खिलाड़ियों के लिए फिलहाल यह अनुपयोगी बना हुआ है। इससे गांव बैजलपुर और आसपास के खिलाड़ियों में भारी रोष है। इसे खिलाड़ियों के लिए नहीं खोलने पर उन्हें अब भी मिट्टी के मैदान में अभ्यास करना पड़ रहा है। इस स्टेडियम का निर्माण न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से गोरखपुर हरियाणा अणु विद्युत परियोजना की सामाजिक सरोकार योजना के तहत करवाया गया है।

रख-रखाव को लेकर अटकी फाइल

एनपीसीआईएल की ओर से बनाए गए इस स्टेडियम का संचालन और रख-रखाव उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। नियमानुसार, इसे खेल विभाग को सुपुर्द किया जाना है ताकि भविष्य में इसका रख-रखाव और संचालन सुचारु रूप से हो सके। इसकी फाइल पिछले चार माह से लंबित पड़ी है। स्टेडियम अब तक खेल विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है।
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मिट्टी के मैदान में तैयारी करने को मजबूर हैं खिलाड़ी

गांव बैजलपुर और आसपास के क्षेत्रों के करीब 200 से अधिक खिलाड़ी प्रतिदिन सुबह और शाम को अभ्यास करते हैं। गांव में हॉकी की एक नर्सरी भी संचालित की जा रही है, लेकिन एस्ट्रोटर्फ की सुविधा न मिलने के कारण खिलाड़ियों को दूसरे जिलों में अभ्यास के लिए जाना पड़ता है।

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गांव में एस्ट्रोटर्फ हॉकी खेल स्टेडियम बनकर तैयार हो चुका है लेकिन खिलाड़ी अभी इसमें खेल नहीं सकते। पिछले चार माह से खिलाड़ियों के लिए यह अनुपयोगी साबित हो रहा है। फाइल पता नहीं कहां धूल फांक रही है।

- धापा, हॉकी खिलाड़ी।



अगर गांव में किसी भी संस्थान ने स्टेडियम बनाकर दिया है तो उसमें खिलाड़ियों को खेलने से क्यों रोका जा रहा है। जब खिलाड़ियों को अच्छा मैदान खेलने और अभ्यास करने के लिए मिलेगा तो उनका प्रदर्शन भी बेहतर होगा।

- पवन ओला, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी।

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गांव में एस्ट्रोटर्फ हॉकी खेल स्टेडियम बनकर तैयार हो है। बस इसे खेल विभाग के सुपुर्द करना है। करीब आठ कराेड़ रुपये की लागत से बने स्टेडियम के रखरखाव से लेकर करीब हर साल 30 लाख रुपये खर्च हाेंगे। खेल विभाग के निदेशक के पास फाइल गई हुई है। शनिवार को गांव बड़ोपल में पहुंचे मुख्यमंत्री को भी इस मामले से अवगत करवाया है।
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- हेमंत बैजलपुरिया, सरपंच गांव बैजलपुर
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