फतेहाबाद। गर्भवती महिलाएं और बच्चे खून की कमी से जूझ रहे हैं। मात्र 20 फीसदी गर्भवती ऐसी है जो गर्भावस्था के दौरान खून की कमी को पूरा कर पा रही है। जिले की 81 फीसदी गर्भवती महिलाओं में जांच के दौरान खून की कमी मिल रही है। ये ही कारण है कि जिले में मातृ मृत्यु दर बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 में जिले में जांच के दौरान 58.2 फीसदी लोगों में खून की कमी मिली है। प्रदेश में जिले की रेंक छठे नंबर पर है। लोगों को खून की कमी को पूरा करने के प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक मई से सात मई से एनीमिया मुक्त अभियान चलाएगा। इस दौरान गर्भवती को आयरन की गोलियां बांटी जाएंगी और स्कूलों में बच्चों में रक्त जांच करके कमी मिलने पर आयरन सिरप दिए जाएंगे। संवाद
जिले में जांच के दौरान मिली रक्त की कमी
गर्भवती महिलाएं : 81.9 फीसदी
6 से 59 माह तक के बच्चे : 60.9 फीसदी
6 से 12 साल तक के बच्चे : 74.4 फीसदी
5 से 9 साल तक के बच्चे : 15.6 फीसदी
जिले में मातृ मृत्यु दर बढ़ी, 120 पर पहुंची
महिलाओं में रक्त की कमी के कारण जिले में मातृ मृत्यु दर बढ़ी है। जिले में वर्ष 2021-22 में 120 तक पहुंच गई है जबकि पहले कम थी। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के मुताबिक मातृ मृत्यु दर बढ़ने का कारण ये ही है कि गर्भवती में खून की कमी होना। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को आयरन गोली दी जाती है लेकिन वह नहीं खाती है। इस वजह से खून की कमी हो जाती है।
60 फीसदी किशोरियों में भी खून की कमी
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं में 11 ग्राम से कम खून नहीं होना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में जांच के दौरान 60 फीसदी किशोरियों में खून की कमी मिली है। इसके अलावा 6 से 12 साल के 74.4 फीसदी बच्चों में खून कम मिला है। मुख्य वजह ये है कि खानपान सही नहीं रख पाते हैं और पौष्टिक आहार नहीं लेते है।
कोट
स्वास्थ्य विभाग एक मई से एनीमिया मुक्त अभियान चला रहा है। इस दौरान लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है और ये ही कारण है कि मातृ मृत्यु दर बढ़ रही है।
-डॉ. सुनीता सोखी, उप सिविल सर्जन