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Fatehabad News: 2 साल 2 महीने 15 दिन बाद फिर से मंत्री विहीन हुआ फतेहाबाद जिला

Wed, 13 Mar 2024 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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कपिल शर्मा
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फतेहाबाद। प्रदेश में हुए बड़े सियासी घटनाक्रम ने फतेहाबाद जिले के भी राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। दो साल दो महीने और 15 दिन बाद एक बार फिर जिला मंत्री विहीन हो गया है। साल 2019 में भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद दो साल तक जिले को मंत्री पद के लिए इंतजार करना पड़ा। इसके बाद 28 दिसंबर 2021 को जजपा कोटे से टोहाना के विधायक देवेंद्र सिंह बबली को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाकर विकास एवं पंचायत विभाग सौंपा गया।
जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से फतेहाबाद से दुड़ाराम व रतिया से लक्ष्मण नापा भाजपा, जबकि टोहाना से देवेंद्र बबली जजपा की टिकट पर विधायक बने। दिनभर जिले के राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोग टीवी, सोशल मीडिया व समाचार-पत्रों की वेबसाइट्स के जरिये राजनीतिक हालात पर नजर गड़ाए रहे। टोहाना में देवेंद्र बबली के कार्यालय व कोठी पर भी सन्नाटा छाया रहा।
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मंत्री बनने के बाद मनोहर लाल के ही नजदीकी रहे बबली

मंत्री बनने के बाद देवेंद्र सिंह बबली तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ही नजदीकी रहे। अपने पैतृक गांव बिढाईखेड़ा में 23 जनवरी 2023 को मधुर मिलन समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बुलाकर बबली ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। इसके बाद भी वह लगातार मंचों से दुष्यंत चौटाला से ज्यादा मनोहर लाल की तारीफों के पुल बांधते रहे। पिछले दिनों ही गांव डूल्ट में पंचायत विभाग के अमृत सरोवरों के उद्घाटन समारोह में देवेंद्र सिंह बबली के साथ मनोहर लाल ने मंच साझा किया था। यही कारण है कि मंगलवार को भी वे दिल्ली में जजपा की बैठक में जाने के बजाय सीधे चंडीगढ़ पहुंचे।

बबली के भाजपा से चुनाव लड़ने की पटकथा तैयार
सूबे के मुखिया रहे मनोहर लाल का भी देवेंद्र सिंह बबली के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रहा है। यही कारण है कि उनको 2024 का विधानसभा चुनाव भाजपा की टिकट पर लड़वाने के लिए पटकथा तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। टोहाना से देवेंद्र बबली के ही सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और 2014 में भाजपा से चुनाव लड़कर विधायक बने सुभाष बराला की राज्यसभा में एंट्री करवाई गई, ताकि बबली का भाजपा में आने का रास्ता साफ हो जाए। जिले के बड़े विकास प्रोजेक्ट्स भी जिला मुख्यालय के बजाय टोहाना शिफ्ट किए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मेडिकल कॉलेज है। इसके लिए पहले फतेहाबाद शहर में जमीन तलाशी गई थी, लेकिन बाद में टोहाना के गांव रसूलपुर में जगह तय की गई।

इसलिए भी महत्वपूर्ण है फतेहाबाद जिला
फतेहाबाद चौटाला परिवार की सियासत के गढ़ सिरसा का पड़ोसी जिला है। इस कारण यहां का राजनीतिक महत्व चौटाला परिवार के लिए महत्वपूर्ण रहता है। लंबे समय तक यहां पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला व उनके परिवार का दबदबा रहा है। 2019 से पहले सिर्फ एक बार 1987 के उपचुनाव में भाजपा ने फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी। इसी तरह टोहाना से भी सिर्फ 2014 में भाजपा प्रत्याशी सुभाष बराला जीत पाए थे। रतिया में तो 2019 में पहली बार भाजपा का खाता खुला था।

अजय चौटाला के परिवार के सदस्य के चुनाव लड़ने की संभावना
राजनीतिक घटनाक्रम से पहले ही फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से इस बार जजपा की टिकट पर अजय सिंह चौटाला के परिवार के किसी सदस्य के चुनाव लड़ने की संभावना दर्शा दी गई थी। सियासी गलियारों में बड़ी चर्चा है कि खुद पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला फतेहाबाद से विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगे। अगर दुष्यंत यहां से चुनाव लड़ेंगे, तो मुकाबला रोमांचक होगा।

भाजपा का देश, प्रदेश व जिले में मजबूत संगठन हैं। कैबिनेट मंत्री रहते हुए देवेंद्र सिंह बबली भी पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल व भाजपा की नीतियों से प्रभावित रहे हैं। हर कार्यकर्ता व नेता का यही लक्ष्य है कि देश व प्रदेश में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनानी है। नए समीकरण भी भाजपा के ही पक्ष में बनेंगे। - बलदेव सिंह ग्रोहा, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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जननायक जनता पार्टी स्व. चौधरी देवीलाल के सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है। हमारा संगठन भी पूरा मजबूत है। पार्टी हाईकमान अगर सभी दस लोकसभा सीटों पर लड़ेगा, तो हर कार्यकर्ता कड़ा संघर्ष करेगा। सरकार में रहकर भी जजपा ने हर वर्ग की आवाज को बुलंद किया है। - रविंद्र बैनीवाल, जिलाध्यक्ष, जजपा
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भाजपा व जजपा का गठबंधन टूटना महज ड्रामेबाजी है। इसका एक ही मकसद है कि विपक्ष के वोटों में सेंध लगाई जा सके। अब जनता इन दोनों पार्टियों की चालबाजी को अच्छी तरह समझ चुकी है। प्रदेश में अब सिर्फ कांग्रेस की लहर चलेगी। - बलवान सिंह दौलतपुरिया, पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता
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