फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होने के बाद 21.66 फीसदी ने नशा छोड़ा

विज्ञापन
ागरिक अस्पताल में चल रहा नशा मुक्ति केंद्र। - फोटो : Fatehabad
विज्ञापन
फतेहाबाद। देसां में देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा। इसी से जिस प्रदेश की पहचान हो और वहां के युवा नशे के आदी हो रहे हैं जो कि चिंता का विषय है। खासकर जहां गांवों की पहचान ही इसी से होती है वहां के युवा भी सबसे ज्यादा नशेड़ी बन रहे हैं। अच्छे खान-पान की जगह हेरोइन, मेडिकल, चूरापोस्त खाकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होकर उपचार लेने के बाद 21.66 फीसदी मरीज नशा छोड़ चुके हैं। 31 प्रतिशत ऐसे मरीज है जो अभी भी नशा ले रहे हैं।
विज्ञापन

ये ही नहीं डेढ़ प्रतिशत मरीज दवाई और नशा दोनों ही ले रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल रहे मरीजों का फॉलोअप रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। हालांकि अभी 37 फीसदी मरीजों से संपर्क नहीं हुआ है। कोरोना महामारी के चलते करीब 18 माह तक नशा मुक्ति केंद्र बंद रहने के बाद एक बार फिर से शुरू हो चुका है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग पहले यहां दाखिल रह चुके मरीजों का फॉलोअप ले रहा है। मई 2018 में नशा मुक्ति केंद्र शुरू हुआ था। शुरू होने के बाद करीब 18 माह तक कोरोना महामारी के चलते बंद रहा और अब सितंबर माह में दोबारा शुरू हुआ है। इससे पहले तक 794 मरीज दाखिल हो चुके हैं, जिनका फॉलोअप लिया गया है। विभाग के अधिकारियों की माने तो अक्तूबर माह तक 834 मरीज दाखिल हो चुके हैं, इसमें ग्रामीण क्षेत्र के सबसे ज्यादा दाखिल हुए हैं। संवाद
जानिए नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होने के बाद मरीजों की स्थिति
स्थिति मरीजों की संख्या
नशा छोड़ गए : 172
नशा छोड़ने की दवाई ले रहे : 33
दवाई और नशा ले रहे : 12
नशा ले रहे : 247
मौत हो गई : 31
संपर्क नहीं हुआ : 299
31 मरीजों की हो चुकी है मौत
नशा मुक्ति केंद्र में सितंबर माह तक दाखिल हुए 794 मरीजों का फॉलोअप लिया गया है। इन मरीजों में से अब तक 31 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें शहरी क्षेत्र से 12 और ग्रामीण क्षेत्र से 19 मरीज शामिल हैं। हालांकि अभी 299 मरीज ऐसे हैं जिनसे संपर्क ही नहीं हुआ है। इन मरीजों ने नंबर बदल लिए या फिर गलत दिए गए थे।
विज्ञापन

साथी के साथ लेता था नशा, ओवरडोज से चली गई जान
गांव भिरड़ाना में 19 मई 2021 को नशे की ओवरडोज के कारण 26 साल के युवक की जान चली गई थी। परिजनों के मुताबिक युवक को उसका साथी ले गया था। यहां पर नशे की ओवरडोज की गई और फिर मौत हो गई थी।
अस्पताल के शौचालय में ले रहा था नशा, हो गई थी मौत
नागरिक अस्पताल के शौचालय में नशे की ओवरडोज से 29 मार्च 2019 को युवक की मौत हो गई थी। फतेहाबाद शहर निवासी युवक ने अस्पताल के शौचालय में नशे की ओवरडोज ले ली थी और उसकी जान चली गई थी। मौके से इंजेक्शन और नशा भी बरामद हुआ था।
हेरोइन, मेडिकल, चूरापोस्त का सबसे ज्यादा नशा
जिले में हेरोइन, मेडिकल और चूरापोस्त नशा सबसे ज्यादा बिक रहा है। हेरोइन नशा पूड़िया बना-बना बेचा जा रहा है और आसानी से उपलब्ध हो रहा है। ये ही ही हालात चूरापोस्त के है।ं दूसरे राज्यों से यहां पर चूरापोस्त सप्लाई हो रहा है।
कोट
नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होने वाले मरीज का टीम दो से तीन माह बाद फॉलोअप लेती रहती है। मरीज को नशा छोड़ने के प्रति जागरूक किया जाता है और उसकी काउंसिलिंग भी की जाती है। मरीज को उपचार को लेकर किसी तरह की समस्या आ रही है तो उसका समाधान भी किया जाता है। लंबे समय तक कोरोना महामारी के चलते नशा मुक्ति केंद्र बंद रहा, अब दोबारा से केंद्र शुरू हो चुका है। टीमें फील्ड में जाकर भी लोगों को नशा छोड़ने के प्रति जागरूक कर रही है।
विज्ञापन

- डॉ. गिरीश, मनोचिकित्सक
कोट
नशे के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसको लेकर एनजीओ का भी सहयोग लिया जाएगा।
- सुरेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें