फतेहाबाद। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संघों के आह्वान पर हुई राष्ट्रव्यापी हड़ताल का जिले में खासा असर रहा। रोडवेज बसों का चक्का जाम रहा। शहर में दो दिन से सफाई नहीं हुई। रविवार की छुट्टी होने व सोमवार को कर्मचारियों द्वारा हड़ताल में शामिल होने से सड़क किनारे गंदगी के ढेर लगे रहे। रोडवेज कर्मचारी बस स्टैंड का मेन गेट बंद करके प्रदर्शन करते रहे। हालांकि, किलोमीटर स्कीम की 14 बसों को रोडवेज प्रशासन ने रविवार रात को ही पुलिस लाइन में खड़ा करवा दिया था, जिन्हें सुबह बिना कंडक्टर ही दिल्ली, चंडीगढ़ व गुरुग्राम के रूटों पर भेजा गया। बाकी पूरे दिन जिले की परिवहन व्यवस्था 200 प्राइवेट बसों के सहारे रही। अधिकांश सरकारी बैंक बंद होने के कारण भी 50 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। मंगलवार को भी हड़ताल रहेगी। सोमवार को दिनभर बिजली की सप्लाई सुचारु रही और पेयजल की समस्या भी नहीं आई।
बस स्टैंड के पास चप्पे-चप्पे पर रहे पुलिसकर्मी
पुलिस प्रशासन द्वारा ज्यादा सुरक्षा प्रबंध लघु सचिवालय व बस स्टैंड के पास ही किए गए। बस स्टैंड के चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। महिला पुलिसकर्मियों को भी लगाया गया। इसके अलावा डीएसपी भी बस स्टैंड परिसर के चक्कर लगाते रहे। हालांकि, ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी, जब कर्मचारियों या पुलिस प्रशासन के बीच तनाव हो।
नौकरीपेशा लोगों को हुई सबसे अधिक परेशानी
रोडवेज बसों के नहीं चलने से नौकरीपेशा लोगों को सबसे अधिक परेशानी हुई। उन्हें समय पर बस नहीं मिल पाई। प्राइवेट बसों की संख्या पर्याप्त रही, लेकिन वे निर्धारित समय के बजाय सवारियों से सीटें फुल होने के बाद ही रवाना हुए। इस कारण अधिकांश नौकरीपेशा लोग मोटरसाइकिल, कार व अन्य निजी वाहनों में सवार होकर ही अपने गंतव्य तक पहुंचे।
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प्राइवेट बस में अधिक भीड़ रही : श्याम
मैं भट्टू रोड पर खाने पीने की वस्तुओं की दुकान करता हूं। रविवार को हांसी स्थित घर गया था। जब हांसी से फतेहाबाद आ रहा था तो प्राइवेट बस में भीड़ बहुत थी। इतनी गर्मी में भीड़ में तंग होना पड़ा। प्राइवेट बस जगह-जगह रुकती हुई भी आई।
रजत श्याम, यात्री
मेरा गांव नूरकीअहली है। ग्रामीण रूटों पर रोडवेज बसें नहीं चलने से सवारियों को परेशानी हुई है। गांव से निजी वाहनों में ज्यादा किराया देकर फतेहाबाद शहर तक आना पड़ा है। निजी वाहनों में भीड़ भी ज्यादा रही।
शंकरदास, यात्री
मुझे किसी जरूरी काम के लिए गुरुग्राम पहुंचना था। सीधे प्राइवेट बस नहीं है। इसलिए रुक-रुक कर जाना पड़ा। पहले घर से फतेहाबाद आने में एक घंटा लगता था, लेकिन सोमवार को दो घंटे लग गए।
दर्शन लाल, यात्री
रोडवेज बसों का चक्का पूरी तरह जाम रहा है। कर्मशाला से लेकर लिपिकिय स्टाफ तक हड़ताल में शामिल हुआ है। निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने पूरी एकता दिखाई है।
राजू बिश्नोई, रोडवेज कर्मचारी नेता
किलोमीटर स्कीम वाली बसों को रूटों पर भेजा गया था। बाकी परिवहन समितियों की बसें भी चलती रही। यात्रियों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
शेरसिंह, महाप्रबंधक, रोडवेज