फतेहाबाद। शहर व गांवों में बढ़ रही बेसहारा पशुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा करीब छह साल पहले बीघड़ रोड पर स्थापित की गई श्रीकृष्ण प्रणामी नंदीशाला के हालात ज्यादा बेहतर नहीं हैं। यहां पर मात्र चार एकड़ जगह में 1700 नंदियों को रखा गया है। इस चार एकड़ जमीन में भी कुछ जगह चारा आदि रखने, बीमार पशुओं के लिए व स्टाफ के लिए है। यही नहीं प्रशासन द्वारा हर माह मिलने वाली आर्थिक सहायता को छह-छह माह लग जाते हैं। नंदियों की संख्या अधिक होने के कारण दम घुटने व नए आए बीमार पशुओं के संपर्क में आने के कारण एक साल में करीब 500 नंदियों की मौत हो चुकी है।
फतेहाबाद के बीघड़ रोड पर करीब छह साल पहले जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायत मताना, स्वामी सदानंद प्रणामी गो सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट, गोशाला संघ हरियाणा व शहर की समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से गांव-शहर मैत्री श्रीकृष्ण प्रणामी नंदीशाला का निर्माण किया था। इस नंदीशाला के निर्माण का मुख्य कारण यह था कि गांवों व शहर में बेसहारा पशुओं की तादाद अधिक बढ़ गई थी और हादसों का खतरा बढ़ गया था। नंदीशाला को चार एकड़ जमीन पर बनाया गया है, जिसमें बेसहारा पशुओं को लाकर उनका रखाव किया जाता है। इस समय 1700 नंदियों का इस नंदीशाला में रखरखाव किया जा रहा है। फतेेहाबाद की श्रीकृष्ण प्रणामी नंदीशाला में बीते साल करीब 500 नंदियों की मौत हो चुकी है। इसका मुख्य कारण यह है कि जगह की कमी और नंदियों की संख्या अधिक होने के कारण उनको बीमारियां लग जाती हैं। कई नंदी इसलिए मर जाते हैं, क्योंकि उन्होंने प्लास्टिक खाया होता है। संवाद
जुलाई 2022 के बाद से अब तक नहीं मिला अनुदान
नंदीशाला के निर्माण के बाद प्रशासन की ओर से भी नंदीशाला को हर माह ग्रांट देने की घोषणा की गई थी। नगर परिषद के द्वारा हर माह नंदीशाला को डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, लेकिन जुलाई 2022 के बाद से अब तक नंदीशाला को ग्रांट नहीं मिली है। वहीं, सरकार की ओर से प्रति नंदी 400 रुपये प्रतिवर्ष के लिए दिया जाता है, जोकि नाकाफी है। एक नंदी पर प्रतिदिन का खर्च करीब 250 रुपये आता है, इसलिए सरकार द्वारा दी जा रही ग्रांट नंदियों के लिए नाकाफी है।
कर्मचारियों के वेतन में चली जाती है प्रशासन की मदद
इस नंदीशाला में नंदियों के रखरखाव के लिए 13 कर्मचारी रखे गए हैं, लेकिन प्रशासन से मिलने वाली डेढ़ लाख रुपये की ग्रांट तो इनके वेतन में ही चली जाती है। इसके अलावा 25 हजार रुपये का डीजल जल जाता है। नंदीशाला का संचालन कर रही समिति को अन्य स्रोतों से नंदीशाला चलानी पड़ रही है।
कोट
नंदीशाला की जगह काफी कम है। यह केवल चार एकड़ में है और नंदियों की संख्या अधिक है। प्रशासन से यही मांग है कि नंदियों के सही रखरखाव के लिए 15 से 20 एकड़ जगह दी जाए, साथ ही ग्रांट भी समय पर दी जाए। गोशालाओं व नंदीशाला में चारे व तूड़ी की कोई कमी नहीं छोड़ी जाती, क्योंकि इसमें सभी का सहयोग लिया जाता है।
-अशोक भुक्कर, मुख्य सेवादार
कोट
पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा नंदीशाला को ग्रांट डाल दी गई है। इस बार नंदीशाला को आठ लाख 45 हजार रुपये की ग्रांट गो सेवा आयोग द्वारा जारी की गई है।
-डॉ. सुखविंद्र, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग।
कोट
नगर परिषद की ओर से नंदीशाला को हर माह डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस बार इन्होंने बिल ढाई लाख रुपये के हिसाब से बना दिए, जिस कारण देरी हो गई। इसका ऑडिट होते ही नंदीशाला को सहायता राशि प्रदान कर दी जाएगी।
ऋषिकेश, ईओ, नगर परिषद फतेहाबाद।