महात्मा विरेंद्र को पगड़ी पहनाते परिवार के सदस्य।
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डेरा जगमालवाली के संत वकील साहब के चोला छोड़ने के बाद उनकी गद्दी को लेकर उपजा विवाद शुक्रवार को लगभग समाप्त हो गया है। शुक्रवार देर रात को डेरा जगमालवाली की 25 सदस्यीय कमेटी व संत वकील साहब के परिजनों ने महात्मा विरेंद्र को संत वकील साहब का उत्ताराधिकारी घोषित कर दिया। संत विरेंद्र अब डेरे में ही रहेंगे और डेरे का कामकाज संभालेंगे। हालांकि संत विरेंद्र ने कहा है कि जब तक यह विवाद पूरी तरह से निपट नहीं जाता, वह न तो सत्संग करेंगे और ना ही संगत को नामदान देंगे।
विरेंद्र सिंह उत्तराधिकारी बनने के बाद संत वकील साहब की गद्दी पर भी नहीं बैठे, वह नीचे बैठे रहे। इस दौरान 25 सदस्यीय कमेटी के प्रमुख सदस्य गुरमेल सिंह सेवादार, ट्रस्टी शंकरलाल, संत वकील साहब के भतीजे एवं ट्रस्टी विष्णू, संत वकील साहब की बहन लागेश्वरी देवी, कमेटी सदस्य अनिल कुमार, राजेश सेवादार, गांव जगमालवाली के सरपंच प्रतिनिधि सतपाल सहित अन्य कमेटी सदस्य मौजूद रहे।
डेरा का संचालन कर रही 25 सदस्यीय समिति ने फैसला लिया है कि महात्मा विरेंद्र ही डेरा जगमालवाली के उत्तराधिकारी बनेंगे। उनको शुक्रवार को डेरा का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया है। डेरे का संचालन अब महात्मा विरेंद्र ही करेंगे। विष्णू, दिवंगत संत वकील साहब के भतीजे एवं डेरा के ट्रस्टी।
एक अगस्त को 1:35 मिनट पर संत साहिब ने छोड़ा था चोला
अपोलो अस्पताल के चिकित्सक डॉ. संदीप गुलिया ने बताया था कि संत वकील साहिब को वर्ष 2010 से जानते थे। वर्ष 2022 में संत साहिब के शरीर में पित्त की थैली में दिक्कत आई थी। इस दौरान पित्त की थैली निकाल दी गई थी। जब उसकी जांच करवाई तो डॉ. अतुल और मुझे जो शक था, सही मिला। उन्हें पित्त की थैली में कैंसर था। आखिरी बार वह फरवरी 2024 और जुलाई 2024 में उपचार के लिए आए। इस दौरान डॉ. विनोद, डॉ. जया व अन्य चिकित्सक उपचार के लिए लगे रहे, लेकिन उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। एक अगस्त को 1:35 मिनट पर उन्होंने चोला छोड़ दिया।