पीजीआई के वार्ड नंबर दो के प्रसूति गृह में एक नवजात शिशु के बदलने का मामला सामने आया है। शिशु के परिजनों का आरोप है कि उन्हें लड़का होने के सूचना दी गई थी और बाद में उन्हें लड़की सौंप दी गई।
मामले को लेकर शिशु के परिजनों ने वार्ड के बाहर हंगामा किया और मेडिकल पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज करवाई। साथ ही पीजीआई के निदेशक से मिलकर डीएनए जांच करवाने की भी मांग की। वहीं निदेशक चांद सिंह ढुल का कहना है कि पीजीआई प्रशासन डीएनए जांच करवाने को तैयार है।
इंदिरा कालोनी निवासी ज्योति पत्नी जोगेंद्र को परिजनों ने सोमवार को डिलीवरी के लिए पीजीआई के वार्ड नंबर दो में भर्ती करवाया। देर शाम को ज्योति को डिलीवरी के लिए प्रसूति गृह ले जाया गया।
ज्योति के परिजनों का कहना है कि प्रसूति गृह के कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि ज्योति को लड़का हुआ है और उन्हें बधाई दी। कुछ समय बाद जब ज्योति को प्रसूति गृह से बाहर लाया गया तो उसके पास बच्ची को लिटा रखा था। यह देख परिजनों ने हंगामा कर दिया।
शोर सुनकर पीजीआई सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत किया। जोगेंद्र ने बताया कि उन्हें लड़का होने की सूचना दी गई थी और बाद में कर्मचारियों ने उनके लड़के को बदल दिया। इसके बाद शिशु के परिजन मेडिकल पुलिस चौकी पहुंचे और शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस ने उन्हें बताया कि वे इस बारे में पहले पीजीआई प्रबंधन से मिले, उसके बाद ही कार्रवाई की जाएगी। बाद में शिशु के परिजनों ने पीजीआई के आलाधिकारियों को इस बारे में शिकायत दी और पीजीआई निदेशक से मिले। जोगेंद्र सिंह का कहना है कि लड़के को बदला गया है। बच्ची की डीएनए जांच करवाई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। महिला अभी पीजीआई में उपचाराधीन है। डॉक्टरों ने भी उन्हें मनाने का प्रयास किया, परंतु शिशु के परिजन डीएनए जांच करवाने की मांग पर अड़े हुए है।