थाना कालांवाली के एक गांव की निवासी दुराचार पीड़िता ने शनिवार को एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के साथ ही एक नई बहस खड़ी हो गई है और साथ ही बच्चे के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गया है।
युवती के परिजनों का कहना है कि वे बच्चे को पालना नहीं चाहते। वे इसे आरोपी के परिजनों को देने का प्रयास करेंगे, यदि वे राजी नहीं हुए तो किसी नि:संतान को गोद दे देंगे, क्योंकि वह अपनी बहन की शादी करना चाहते हैं। वहीं, समाज सेवियों का कहना है कि किसी भी हालत में बच्चा दुराचार के आरोपी के सुपुर्द नहीं किया जाना चाहिए। वहां उसका भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
यह था मामला
युवती ने 12 सितंबर को अपने गांव के ही एक युवक बलजीत सिंह पर डरा धमका कर दुराचार करने का आरोप लगाया था। युवती ने अपनी शिकायत में कहा था कि बलजीत काफी समय से उससे दुराचार करता आ रहा है। आरोपी के भाई और भाभी ने भी उसे धमकी दी थी। पुलिस ने युवती की शिकायत दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। जो इन दिनों जेल में बंद है। दुराचार की वजह से युवती गर्भवती हो गई। परिजनों को इसकी जानकारी देरी से मिली। शनिवार को सामान्य अस्पताल में युवती ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। युवती के भाई का कहना है कि वे बच्चे को पालना नहीं चाहते। यदि आरोपी के परिजन बच्चा लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं।
आरोपी की संपत्ति में बच्चे का पूरा हक
माता सीता रानी सेवा संस्था हरियाणा के प्रवक्ता और वकील राममोहन राय ने कहा कि बेशक बच्चा दुराचार के बाद हुआ है, लेकिन उसका संबंध बनाने वाले युवक की संपत्ति पर पूरा हक है। इसके साथ ही उसे महीने का खर्च भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि युवती के परिजनों को किसी भी हालत में दुराचार के आरोपी के हाथ में बच्चे को नहीं सौंपना चाहिए। वहां उसे न तो बेहतर परवरिश मिल सकती है और न ही माहौल। यदि युवती के परिजन बच्चे को खुद पालना नहीं चाहते तो या तो उसे किसी को गोद दें या फिर बच्चों को संभालने करने वाली कई संस्थाएं उसे पालने के लिए आगे आ सकती हैं।