आयोजित पंचायत में किसानों को संबोधन करते एसडीएम विरेंद्र सिंह ।
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चरखी दादरी। नेशनल हाईवे 152डी के लिए अधिगृहीत की गई जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए खातीवास गांव के ग्रामीणों रोष जताया। इसको लेकर ग्रामीणों ने पंचायत कर उचित मुआवजे के लिए विचार-विमर्श किया। इस मांग को लेकर किसान पिछले तीन साल से आंदोलनरत है। किसानों की पंचायत की सूचना के बाद एसडीएम दादरी वीरेंद्र सिंह किसानों के बीच पहुंचे और उपायुक्त से मुलाकात करवा उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सरकार की ओर से 2018 में ग्रीन कोरिडोर नेशनल हाईवे 152 डी के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। कुछ गांवों के किसानों ने सरकार पर उचित मुआवजा नहीं देने के आरोप लगाए थे। इनसे खातीवास गांव के ग्रामीण भी थे। इस मांग को लेकर ग्रामीणों ने चिड़िया मार्ग नजदीक रामनगर में धरना शुरू किया। कोरोना के खतरे के बीच धरना स्थगित भी किया गया था। इसी मसले पर सोमवार को गांव में पंचायत हुई। ग्रामीणों ने बताया कि सरकार द्वारा इस जमीन की प्रति एकड़ 10 लाख राशि निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में 18 लाख तक बढ़ाया गया। किसान 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ दिए जाने की मांग कर रहे है। खातीवास गांव के 439 किसानों की करीब 70 एकड़ जमीन अधिगृहीत की गई है। पंचायत में उचित मुआवजे के लिए नेशनल हाईवे का निर्माण रोकने के लिए भी विचार विमर्श किया गया। इसकी भनक प्रशासन को लगते ही मौके पर एसडीएम दादरी वीरेंद्र सिंह, डीएसपी जोगेंद्र सिंह पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे और किसानों को मनाने लगे। एक घंटे बाद इस आश्वासन पर ग्रामीण माने की उपायुक्त प्रदीप गोदारा से मिलवा कर मुआवजा बढ़ाने के लिए सरकार से बात करेंगे।
हम उपायुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक को 46 बार पत्र लिख चुके है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, एनएचआई चीफ, उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को भी पत्र द्वारा अवगत करवा चुके, लेकिन आज तक समस्या का कोई समाधान नही हुआ है। अगर उचित मुआवजा नहीं मिलता है तो वे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। - अनूप सिंह, किसान नेता