वहीं, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने खामियों से इन्कार करते हुए बस स्टैंड उद्घाटन में हो रही देरी के लिए परिवहन विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों की बस सेवा को बेहतर करने के लिए जनप्रतिनिधि व क्षेत्रवासियों की मांग पर सरकार ने झोझूकलां और कादमा में बस स्टैंड बनाया है। कादमा बस स्टैंड निर्माण पर करीब 2.90 करोड़ तो झोझूकलां बस स्टैंड निर्माण पर 1.38 करोड़ रुपये की लागत आई है। अहम बात ये है कि बस स्टैंड बने एक साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब तक इनका उद्घाटन नहीं हो पाया है। फिलहाल यहां से कुछ बसों का संचालन तो किया जा रहा है, लेकिन यात्रियों के लिए सुविधाएं बस स्टैंड की तर्ज पर नहीं हैं।
परिवहन और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का तालमेल बिगड़ा हुआ है और ये ही कारण है कि बस स्टैंड परिवहन विभाग को सुपुर्द करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई। रोडवेज डिपो संस्थान प्रबंधक दीपक कुमार का कहना है कि दोनों बस स्टैंड में काफी खामियां हैं और जब तक ये दूर नहीं होंगी तब तक विभाग भवनों को अपने अधीन नहीं ले सकता। वहीं, पीडब्ल्यूडी एसडीओ अश्वनी भारद्वाज का कहना है कि झोझूकलां बस स्टैंड परिवहन विभाग अपने अधीन ले चुका है जबकि कादमा बस स्टैंड की जो खामियां बताई गई थीं, उन्हें दूर करवाकर विभागीय अधिकारियों का निरीक्षण करवाया जा चुका है। इसके बावजूद परिवहन विभाग इसे अपने अधीन नहीं ले रहा।
- हर निरीक्षण के दौरान सामने आई खामी
परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो मुख्यालय की ओर से गठित की गई कमेटी ने भवनों का तीन बार निरीक्षण किया। हर निरीक्षण में खामियां मिलीं और इसके चलते 25 आपत्तियों की सूची पीडब्ल्यूडी को भेजी गई। एक साल बीतने के बाद भी महज 16 आपत्तियों को ही दूर किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि आपत्तियां दूर करने के लिए तीन बार पीडब्ल्यूडी को पत्र लिख चुके हैं।
-जानिये...कितनी जमीन पर बने हैं दोनों बस स्टैंड
झोझूकलां का नवनिर्मित बस स्टैंड 7 कनाल 15 मरला जमीन पर बना है। वहीं, कादमा बस स्टैंड 13 कनाल 12 मरला जमीन पर बना है। बस स्टैंड परिसर के बाहर बसें लगने से यात्री इधर-उधर भटकते रहते हैं, जबकि मूलभूत सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिल पा रही।
- ये लगाई गई आपत्तियां
गांव झाेझूकलां बस स्टैंड परिसर के निरीक्षण के दौरान टीम को दिव्यांग गेट में कमी मिली। मुख्य गेट के समीप दीवार टूटी हुई है जबकि छत का लेंटर नियमानुसार नहीं है। दीवार में अंडरग्राउंड की जगह ओपन पाइप लगाए गए है। इसी प्रकार कादमा बस स्टैंड भवन में भी कई खामियां गिनवाई गई हैं।
- पीडब्ल्यूडी और परिवहन विभाग के अधिकारी आमने-सामने
हमने कई बार पीडब्ल्यूडी विभाग को आपत्तियां ठीक करने के लिए पत्र लिखा है। अब तक पीडब्ल्यूडी विभाग ने नवनिर्मित बस स्टैंड परिसर की खामियों को दूर नहीं किया है। ये खामियां दूर होने के बाद ही बस स्टैंड अपने अधीन लेकर उद्घाटन करवा सकेंगे। जब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं होगी तब तक बस स्टैंड परिसर की सुविधाओं व सेवाओं में विस्तार नहीं कर सकते।
-दीपक कुमार,रोडवेज संस्थान प्रबंधक
झोझूकलां बस स्टैंड को विभाग अपने अधीन ले चुका है जबकि कादमा बस स्टैंड की जो खामियां गिनवाई गईं उन्हें दुरुस्त करवा दिया है। जान-बूझकर परिवहन विभाग बस स्टैंड भवन को अपने अधीन नहीं ले रहा। तीन साल तक एजेंसी को भवनों की देखरेख करनी है। विभाग जब चाहे खामी एजेंसी से दूर करवा सकता है।
-अश्वनी भारद्वाज, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी