चरखी दादरी। दो सरकारी विभागों में आपसी तालमेल की कमी के कारण मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर डाटा चढ़ाने में बड़ी चूक सामने आई है। अधिकारियों ने ढाणी फौगाट और फौगाट गांव के किसानों का रिकॉर्ड का अदला-बदला कर दिया। अधिकारी इन गांव में ढाणी का फर्क नहीं समझ सके, जिससे इन गांवों के करीब 2000 किसानों की फसल बिक्री पर अब तलवार लटक गई है, जबकि इन दोनों गांवों में करीब 25 किलोमीटर की दूरी है। अब डीसी प्रदीप गोदारा की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर इस चूक को सुधारने के कार्य की मॉनीटरिंग की जा रही है।
जिला के दो गांवों की खरीफ फसल पंजीकरण का डाटा चढ़ाने में इस बार चूक हुई है जिसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। इन दोनों गांवों की बिजित फसलों की सजरा यानी फील्ड रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। गौरतलब है कि जो किसान मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी फसलों का पंजीकरण करवाता है। उसकी फसल ही खरीदी जाती है। जिले में अब खरीफ फसल की खरीद की जा रही है। इसके लिए किसानों पोर्टल पर अपनी फसलों को पंजीकरण करवाया है। इसके भौतिक सत्यापन के लिए सरकार ने फील्ड से मौके पर जाकर बिजित फसलों की सर्वे रिपोर्ट तैयार करवाई है। इसके लिए कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीम ने खेतों में पहुंचकर सर्वे किया है। सर्वे के लिए ढाणी फौगाट और फौगाट गांव में दोनों विभाग की टीम अलग अलग सर्वे के लिए पहुंची। इसके बाद अधिकारियों ने किसानों की फसल पंजीकरण का डाटा गांव फौगाट के पोर्टल पर ढाणी फौगाट व फौगाट गांव के किसानों का डाटा ढाणी फौगाट के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। इससे दोनों गांव के किसानों पर फसल बिक्री की तलवार लटक गई है। एक अधिकारी ने बताया कि कृषि और राजस्व विभाग की टीमों ने अलग-अगल समय खेतों में पहुंचकर सर्वे किया था। इस दौरान दोनों विभाग का सर्वे डाटा भी मैच नहीं खाया। अगर दोनों विभाग की टीम संयुक्त सर्वे करती तो इस तरह की दिक्कत नहीं आती।
पंजीकरण के बाद सरकार ने तैयार करवाई फील्ड रिपोर्ट
फसल पंजीकरण होने के बाद सरकार ने इस बार फील्ड से मौके पर जाकर बिजित फसलों की सर्वे रिपोर्ट तैयार करवाई थी ताकि वास्तविकता का पता चल सके। पहले काफी किसान एक ही परिवार से तीन पंजीकरण तक करवा देते थे लेकिन धरातल पर फसल बिजित नहीं होती थी या फिर दूसरी फसल बिजित मिलती थी। ऐसे में खरीद कार्य में दिक्कतें आती रहीं।
हेड ऑफिस की टीम भी जुटी खामी को सुधारने में
किसानों की फसल पंजीकरण का डाटा गांव फौगाट के पोर्टल पर व फौगाट गांव के किसानों का डाटा ढाणी फौगाट के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। अब विभाग को पता चलने पर आनन-फानन में इस तकनीकी त्रुटि को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन निचले स्तर पर यह त्रुटि दूर नहीं हो पा रही है। हेड ऑफिस से ही विशेषज्ञों की टीम इसे दुरुस्त करने के प्रयास में जुटी है। वहीं, डीसी की अध्यक्षता में इसे लेकर कमेटी का गठन किया गया जो इसकी लगातार निगरानी रखे हैं।
जिले में कृषि योग्य रकबा की स्थिति
जिले का कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। जिले में बाजरा का रकबा 137500 एकड़ है। इसी प्रकार कपास का रकबा 86250, धान का रकबा 12500, मूंग का रकबा 8562, गन्ना का रकबा 3750 और ग्वार का रकबा 6250 एकड़ है।
किसान बोल-जल्द खामियों को दूर करवाए प्रशासन, झेल रहे दिक्कतें
मैंने अपना सारा ब्योरा पोर्ट पर सही भरवाया था। अब डाटा मिस मैच होने की खामी सामने आई है। इस समस्या से गांव के सभी किसान परेशान हैं। प्रशासन को जल्द से जल्द समस्या का समाधान करवना चाहिए। - भोलूराम, किसान
हमारे गांव के किसानों का डाटा मिस मैच कर रहा है और इससे फसल बिक्री पर संकट मंडरा रहा है। परेशान किसान विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जल्द समाधान करवाने का आश्वासन ही मिल रहा है। - अमन, ढाणी फौगाट
दोनों गांवों का खरीफ फसल पंजीकरण डाटा मिस मैच हो गया है। आपस में एक-दूसरे गांव के पोर्टल पर अपलोड होने से दिक्कत बन रही है। डीसी की अध्यक्षता में कमेटी इस पर काम कर रही है। जल्दी ही समस्या को दूर कर दिया जाएगा। - प्रमेंद्र सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी, चरखी दादरी