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26 की उम्र में दूसरे ही प्रयास में आईएएस बने शाश्वत सांगवान

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आईएएस शाश्वत सांगवान अपने परिजनों के साथ। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। यूपीएससी के सोमवार को घोषित परिणाम में पैंतावास खुर्द निवासी शाश्वत सांगवान 34वीं रैंक प्राप्त कर आईएएस बने हैं। सांगवान ने यह उपलब्धि अपने तीसरे प्रयास में हासिल की है। 26 वर्षीय शाश्वत गांव के पहले आईएएस हैं। उनका परिवार पिछले लंबे से बहादुरगढ़ में रह रहा है।
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शाश्वत सांगवान ने पिछली परीक्षा में 320वीं रैंक हासिल की थी और उनका चयन आईडीईएस (इंडिया डिफेंस ईस्टेट सर्विस) के लिए हुआ था। कड़ी मेहनत के बल पर इस बार सांगवान ने 34वीं रैंक हासिल करने में कामयाब रहे। शाश्वत के पिता सतीश और मां ललिता सांगवान पेशे से डॉक्टर हैं। सतीश सांगवान ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं, जिनमें शाश्वत बड़ा है और बेटी छोटी है, जो कि एमबीबीएस कर रही है। पिछली बार शाश्वत अपनी रैंक से संतुष्ट नहीं था। इसी के चलते आईडीईएस की ट्रेनिंग के दौरान भी उसने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और इसका सकारात्मक परिणाम इस बार मिला है।
शाश्वत ने बारहवीं कक्षा दिल्ली के आरकेपुरम स्थित डीपीएस से पास की, जबकि बीट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की है। इंजीनियरिंग करने के बाद शाश्वत ने करीब डेढ़ साल तक प्राइवेट कंपनी में जॉब की और इसके साथ ही यूपीएससी की तैयारी की। शाश्वत पैंतावास खुर्द गांव से इकलौता आईएएस है और इसकी उन्हें बेहद खुशी है।
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नहीं ली की कोचिंग, पांच से छह घंटे तक पढ़ाई कर पाई सफलता
सतीश सांगवान ने बताया कि बेटे शाश्वत ने यूपीएससी के लिए कभी कोचिंग नहीं ली। करीब ढाई साल से उनके बेटे ने सेल्फी स्टडी के जरिये ही यह मुकाम पाया है। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान भी शाश्वत ने पांच से छह घंटे पढ़ाई की। इसका नतीजा है कि इस बार 34वीं रैंक प्राप्त हुई।
माता-पिता डॉक्टर, घर में आज भी नहीं है टीवी
शाश्वत के पिता सतीश और मां ललिता दोनों मेडिकल लाइन से जुड़े हैं। इसके बावजूद उनके घर आज तक टीवी नहीं खरीदा गया है। सतीश सांगवान ने बताया कि उनके बेटा व बेटी ने न केवल टीवी, बल्कि मोबाइल से भी दूरी बनाए रखी।
खेल की तरफ था रुझान
सतीश सांगवान ने बताया कि उनके बेटे की ज्यादा रुचि शुरुआत से ही खेलों की तरफ थी। शाश्वत बास्केटबॉल के अलावा अच्छा धावक है और वो 42 किलोमीटर की मैराथन में विजेता रह चुका है। बीट्स पिलानी में इंजीनियरिंग के दौरान अपने सीनियर्स की भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में नियुक्ति होने से शाश्वत बेहद प्रभावित हुआ। इसके बाद उसने प्राइवेट जॉब करते हुए यूपीएससी की तैयारी शुरू की।
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