चरखी दादरी। रामलीला ग्राउंड में रविवार को रामलीला मंचन के तहत कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया। पुत्र राम के वियोग में राजा दशरथ का प्राण त्यागने और श्री राम-भरत संवाद की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मुख्य अतिथि के रूप में महाबीर शर्मा और रविंद्र गुप्ता ने शिरकत की।
मंच के माध्यम से कलाकारों द्वारा राम के वनवास गमन के उपरांत पुत्र वियोग में महाराज दशरथ की मृत्यु होना, राम, सीता व लक्ष्मण को केवट द्वारा नदी को पार करवाना व भगवान द्वारा उसे भव सागर से पाल लगा देने की विनती का सजीवता से चित्रण किया गया। इसके अलावा राजा दशरथ की मृत्यु के बाद दाह संस्कार व अन्य रीति रिवाजों के निर्वहन के लिए दूत भेजकर भरत व शत्रुघ्न को ननिहाल से वापस बुलाना, अयोध्या लौटने पर नगरवासियों द्वारा उपेक्षा पूर्ण व्यवहार करना, महल पहुंचने पर मंथरा का खुशी जताना, माता कैकेयी से शत्रुघ्न का भला- बुरा कहना आदि प्रसंगों के जरिये दर्शकों ने लीलाओं का आनंद लिया। माता कौशल्या से जाकर भरत का मिलना व समस्त दुखद परिस्थितियों के लिए अपने आप को जिम्मेदार बताने के मंचन से दर्शक भावुक हो गए। इसके बाद अयोध्यावासियों और सभी माताओं को साथ लेकर भरत और शत्रुघ्न बड़े भाई राम और लक्ष्मण व माता सीता को लेने के लिए वन में जाते हैं, लेकिन श्रीराम पिता की आज्ञा बताकर वनवास की समय अवधि पूरी होने के बाद ही अयोध्या लौटने की बात कहते हैं। बार-बार आग्रह करने के बाद भी वे अपने फैसले पर अडिग रहते हैं। इसके बाद भरत का बड़े भाई श्रीराम की चरण पादुकाएं सिर पर रखकर अयोध्या लौटने तक की लीला का मंचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रामलीला कमेटी प्रधान उमेद सिंह प्रजापत ने की।
इस मौके पर राधेश्याम बीकानेरिया, चेयरमैन मनोज वर्मा, राहुल मराठा, वरिष्ठ उपप्रधान रिंपी फौगाट, उपप्रधान जयभगवान मस्ताना, रोहताश शर्मा, महासचिव राजकुमार बंसल, सचिव रवि फौगाट, कोषाध्यक्ष शिव कुमार शर्मा, सह कोषाध्यक्ष अखिलेश बंसल, स्टेज कवि राधेश्याम बीकानेरिया, भोजराज शास्त्री, डायरेक्टर हरीश गर्ग, हरिओम बंसल, कथा वाचक रोहताश गुप्ता, राजेश खंचाजी, प्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।