चरखी दादरी। अब कोई व्यक्ति अपने घर में शौचालय कुई का निर्माण सिंगल पीठ में नहीं करवाएगा। सभी कुई डबल पीठ में बनेगी। कुई की गहराई एक या दो मीटर से ज्यादा नहीं होगी। ऐसा करके मल से खाद भी तैयार की जा सकेगी। स्वच्छता मिशन के तहत नए निर्देश जारी हुए है।
शहरी क्षेत्रों में तो लोगों ने सीवर मैनहोल में शौचालयों का कनेक्शन किए हुए हैं। जिससे मल सीवर लाइनों में चला जाता है लेकिन गांवों में सीवर लाइन नहीं होने की वजह से लोगों ने अपने मकान के सामने गलियों में शौचालयों की कुई बना रखी है। इसमें मल एकत्रित हो जाता है। ये कुई बार-बार भर जाने से परेशानी होती है। खासकर बारिश के सीजन में वाॅटर लेवल काफी ऊपर आ जाने से कुई जल्दी भर जाती है। इससे लोगों को परेशानी होती है। बार-बार कुई को खाली करवाना पड़ता है।
अब स्वच्छता मिशन के तहत विशेष योजना तैयार की गई है। इसके तहत लोगों को अब सिंगल की बजाय डबल पीठ की कुई बनवानी होंगी। इसकी गहराई एक से दो मीटर तक की जा सकेगी जबकि इस समय लोगों ने आठ से नौ मीटर गहरी तक बना रखी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एक से दो मीटर की गहराई में वह सभी सूक्ष्म जीवाणु व विषाणु मौजूद होते हैं जो मल को खाद में तबदील करने में सहायक होते हैं। इस मल को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
- प्रति परिवार 5 हजार की राशि की जा सकेगी खर्च
इस काम को सिरे चढ़ाने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रति परिवार पांच हजार रुपये की राशि खर्च कर सकेगी। यह राशि 15वें वित्त आयोग के तहत खर्च की जाएगी। इसके लिए पहली किस्त के रूप में बजट जारी हो चुका है। इसी माह इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू होने जा रहा है।
- स्वच्छता मिशन से जिले में कई गुना बढ़ी शौचालयों की संख्या
स्वच्छता मिशन के तहत आजकल तकरीबन सभी घरों में शौचालय बने हुए हैं। पुराने समय में घरों में शौचालय नहीं होते थे। लोग बाहर खुले में ही शौच करते थे। इस मिशन के बाद जागरूकता आई और सरकार की ओर से भी प्रति शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की राशि जारी की गई थी। ग्राम पंचायतों के सहयोग से इन शौचालयों का निर्माण करवाया गया था। इसके अलावा सार्वजनिक शौचालयों का भी निर्माण करवाया गया।
लोगों को अब सिंगल के बजाय डबल पीठ के शौचालय बनवाने होंगे। कुई की गहराई एक या दो मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सरकार की ओर से ग्रांट जारी कर दी गई है। इस माह के अंत तक इस पर काम शुरू होने जा रहा है। लोग कुई में खाद तैयार कर सकते हैं।
-सतीश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी, स्वच्छता मिशन