चरखी दादरी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड शैक्षणिक ढांचे में बदलाव कर रहा है। इसके तहत 10वीं में दस विषय होंगे, जिनमें तीन भाषाएं और सात विषय होंगे। इसी तरह 12वीं में छह विषय होंगे, जिनमें चार विषय और दो भाषाएं होंगी। इस बदलाव पर शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे भाषा ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा। विविध भाषाओं के ज्ञान से विद्यार्थियों में संचार कौशल बढ़ता है।
जनमंच के माध्यम से लोगों ने कहा कि कई भाषाओं का ज्ञान होने पर बच्चे को किसी दूसरे राज्य में रोजगार करने में सुविधा होगी। इनका कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड की ओर से यह प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
दूसरे राज्यों में काम करने में नहीं आएगी दिक्कत
कई भाषाओं का ज्ञान होने पर बच्चे को किसी दूसरे राज्य में रोजगार के अवसर आसानी से मिल सकेंगे। उसे काम करने में दिक्कत नहीं आएगी। दसवीं कक्षा में तीन भाषाओं के पढ़ाने से संचार कौशल को बढ़ावा मिलेगा। नई शिक्षा नीति आने वाले समय में कारगर साबित होगी। पाठ्यक्रम में दो से तीन भाषाओं को शामिल करना सराहनीय कदम है। - बलराज फौगाट, शिक्षक एवं स्कूल प्रबंधक
रोजगार के ज्यादा अवसर होंगे सृजित
नई शिक्षा नीति में भाषा व विषयों दोनों पर ज्यादा बल दिया गया है। दसवीं कक्षा में तीन भाषाओं का ज्ञान कराने से विद्यार्थियों का संचार कौशल बढ़ेगा। उसके लिए रोजगार के ज्यादा अवसर सृजित हो सकेंगे। भाषा के बिना दूसरे देश व राज्य में व्यवसाय व रोजगार कर पाना आसान नहीं होता है। केंद्रीय शिक्षा बोर्ड का यह फैसला सही है। - नमितादास, प्राचार्या, एचडी बिरोहड़
शिक्षा स्वरूप में बदलाव करना गलत
नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के हित मेंं नहीं है। शिक्षा स्वरूप में बदलाव करना गलत है। ऐसी नीतियां शिक्षा के लिए सही नहीं हैं। ऐसे विषयों पर ध्यान देना चाहिए जिससे रोजगार की संभावनाएं अधिक बढ़ें। दसवीं व बारहवीं में विषयों में बदलाव करना सही फैसला नहीं है। सरकार को नई शिक्षा नीति को वापस लेना चाहिए। - संजय शास्त्री, जिला अध्यक्ष, हरियाणा विद्यालय राजकीय अध्यापक संघ