हरियाणा के चरखी दादरी में किसान आंदोलन के दो साल पूरे होने के बाद भी एमएसपी समेत अन्य मांगें पूरी न होने पर इलाके की खापें एकजुट होकर फिर से सक्रिय हो गई हैं। खाप पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार के उदासीन रवैये पर रोष जताया। गुरुवार को इस विषय में स्वामी दयाल धाम पर बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न खापों समेत सामाजिक और किसान संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
सर्वसममति से 28 नवंबर को सुबह 11 बजे सभी लंबित मांगों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने का फैसला लिया। फौगाट खाप 19 के प्रधान बलवंत नंबरदार ने कहा कि किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने भले ही तीन कृषि कानून वापस ले लिए हो, लेकिन एमएसपी को कानूनी दर्जा अभी तक नहीं दिया गया है। इसे लेकर जिस कमेटी का गठन केंद्र सरकार ने किया है उससे भी किसान वर्ग में भारी असंतोष है।
सांगवान खाप 40 के सचिव नरसिंह डीपीई ने कहा कि आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को केंद्र सरकार ने अभी तक कोई आर्थिक मदद नहीं दी है। श्योराण खाप 25 से किसान नेता राजू मान ने कहा कि किसान आंदोलन में इलाके की खापों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था और केंद्र सरकार को तीन कानून वापस लेने को मजबूर कर दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की बकाया मांगों को जल्द पूरा करना चाहिए।
किसान सभा के जिला प्रधान रणधीर कुंगड़ ने कहा कि सरकार को किसानों की अनदेखी भारी पड़ेगी। इस अवसर पर फौगाट खाप के सचिव सुरेश फौगाट, अन्नदाता यूनियन के रामकुमार कादयान, सुनील पहलवान, चिड़िया खाप से संत कुमार, डॉ. रामफल, धर्मपाल महराणा, शमशेर खातीवास, सुरेंद्र पूर्व सरपंच कुब्जानगर, सतगामा खाप से जगबीर प्रधान, रामसिंह बलकरा, राजबीर टिकान, एडवोकेट गिरेंद्र फौगाट, धर्मेंद्र फौगाट, उदयवीर, नत्थूराम, सीताराम, सुरेश सांगवान, त्रिलोक, अमित, महिपाल, बलबीर, प्रेम, कर्ण सिंह व महेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।