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विडंबना : ऑर्थो मरीजों के लिए वार्ड है न ओटी में अतिरिक्त उपकरण सेट

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अस्पताल स्थित ओटी में ऑपरेशन करती चिकित्सकों की टीम। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। जिला अस्पताल में ऑर्थो ओपीडी शुरू हुए डेढ़ साल के करीब हो चुका है। पिछले चार माह से ऑर्थो ओटी में ऑपरेशन भी हो रहे हैं। इसके बावजूद अब तक ऑर्थो मरीजों के लिए सिविल अस्पताल में अलग से वार्ड नहीं है। नियमों की बात करें तो पुरुष व महिला मरीजों के लिए अलग से वार्ड का प्रावधान है। इतना ही नहीं, ओटी में उपकरण का एक ही सेट है जिसके चलते एक दिन में दो ही ऑपरेशन हो पा रहे हैं। उपकरण सेट की संख्या यहां तीन से चार करने की जरूरत है।
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संवाददाता ने शुक्रवार को सिविल अस्पताल पहुंचकर ऑर्थो ओपीडी की सेवाओं का जायजा लिया तो वार्ड की कमी समेत कुछ अन्य पहलू सामने आए। सबसे अहम खामी तो यह है कि ऑर्थो मरीज को ऑपरेशन के बाद निगरानी में रखने के लिए अलग से वार्ड नहीं है। ऑर्थो मरीजों को सामान्य वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों के साथ रखा जा रहा है जबकि इससे इंफेक्शन का खतरा काफी रहता है। सिविल अस्पताल के दो तल पर 8 वार्ड हैं, जो सामान्य मरीजों या गर्भवती महिलाओं के लिए ही हैं। सिविल अस्पताल में ऑर्थो मरीजों के लिए एक भी वार्ड नहीं है जबकि नियमानुसार यहां दो वार्ड होने चाहिए। ऑर्थो मरीजों को वार्ड वातानुकूलित रहता है, ताकि इंफेक्शन का खतरा कम रहे।
सिविल अस्पताल में नवंबर 2020 में ऑर्थो स्पेशलिस्ट की तैनाती होने के कुछ समय बाद ही ओपीडी शुरू हो गई थी। लंबे इंतजार के बाद गत फरवरी में यहां पर छोटे ऑपरेशन यहां शुरू हुए थे जबकि गत अप्रैल माह से ऑपरेशन सुविधा में विस्तार किया गया है। अभी इस सेवा में और विस्तार की दरकार है, लेकिन संसाधनों व जगह की कमी इसके चलते आड़े आ रही है।
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- 80 प्रतिशत ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली सी-आरम मशीन ही नहीं
ऑर्थो के 80 फीसदी ऑपरेशन में सी-आरम मशीन इस्तेमाल होती है। ऑपरेशन में यह मशीन बहुत सहायक और फ्रेक्चर समेत अन्य ऑपरेशन में यह हड्डी की बिल्कुल सटीक जानकारी देती है। यह मशीन सिविल अस्पताल में नहीं है जिसके चलते ऑपरेशन सुविधाओं में विस्तार नहीं हो पा रहा।
- हर माह 2200 से अधिक ओपीडी रहती है
सिविल अस्पताल में ऑर्थो ओपीडी लगातार बढ़ी है। पिछले दो माह की अगर बात करें तो ओपीडी 2200 से ऊपर है। इस लिहाज से प्रतिदिन उपचार के लिए 70 से 75 मरीज पहुंचते हैं। इतना ही नहीं अब तक ऑर्थो ओपीडी में 40 से अधिक ऑपरेशन हो चुके हैं।
- सामान्य से चला रहे काम, मॉड्यूलर ओटी की दरकार
सिविल अस्पताल को ओटी सामान्य है जबकि ऑर्थो के लिए मॉड्यूलर ओटी बेहतर रहता है। मॉड्यूलर ओटी में ऑटोमेटिक सुविधा मिलती है। जिससे ओटी के स्टाफ का बार-बार कोई चीज छूनी नहीं पड़ती। स्टाफ अगर कुछ छूएगा नहीं तो मरीज के इंफेक्शन की चपेट में की संभावना काफी कम रहेगी।
- जिले में तीन ऑर्थो स्पेशलिस्ट हैं तैनात
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि सिविल अस्पताल में तीन ऑर्थो स्पेशलिस्ट तैनात हैं, पर जगह की कमी के चलते तीनों एक ही कमरे में ओपीडी देख रहे हैं। उस कमरे में भी दो ही मेज हैं। तीन ऑर्थो की तैनाती का फायदा अगर जिले के मरीजों को देना है तो विभाग को संसाधनों की कमी तत्परता से दूर करनी होगी।
जगह की कमी के चलते ऑर्थो मरीजों के लिए हम वार्ड की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, संसाधनों की कमी कुछ हद तक दूर हो चुकी है और जल्द ही अन्य संसाधन भी जुटा लिए जाएंगे।
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-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग
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