चरखी दादरी। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल आपूर्ति और पानी के सैंपल लेने में कोताही बरती जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 6 माह में 2100 की जगह महज 1361 सैंपल ही लिए गए हैं। लैब में इनकी जांच में 570 फेल पाए गए हैं। लैब विशेषज्ञों के अनुसार पानी के जो सैंपल फेल मिले हैं उनमें कोलीफाॅर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है।
नियमों की अगर बात करें तो प्रत्येक पंचायत के हर वार्ड से एक माह में 3 सैंपल लेने अनिवार्य हैं। दूसरी ओर धरातल पर इसका पालन नहीं हो रहा है। पिछले 6 माह के सैंपल का आंकड़ा देखकर इसका स्पष्ट पता चलता है। सैंपल संख्या और जांच रिपोर्ट से स्पष्ट है कि विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में नियमानुसार पेयजल आपूर्ति और सैंपल लेने की कार्रवाई नहीं कर रहा है।
विशेषज्ञों की माने तो ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के करीब 40 प्रतिशत सैंपल लैब की जांच कसौटी पर खरा नहीं उतर पाए हैं। सैंपल जांच के दौरान प्रति 100 एमएल पाली में 39 कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। नियमानुसार पानी में एक भी कोलीफाॅर्म बैक्टीरिया नहीं होना चाहिए। इतना ही नहीं पानी में क्लोरिन की मात्रा भी बेहद कम पाई गई है जो कि काफी चिंतनीय है।
जानिये...किस खंड से लिए गए कितने सैंपल और क्या रही रिपोर्ट
खंड - सैंपल लिए - सही मिले - फेल पाए गए
बाढड़ा - 351 - 199 - 152
दादरी-1 - 335 - 197 - 138
दादरी-2 - 280 - 164 - 280
झोझूकलां - 395 - 231 - 164
- क्या है पानी के सैंपल लेने के नियम
जनस्वास्थ्य विभाग को एक माह में प्रति वार्ड तीन पानी के सैंपल लेने होते हैं। सैंपल लेते समय वार्ड पंच का होना व यूनिक कोड लगाना जरूरी होता है। पानी का सैंपल साफ कांच की बोतल में लेना होता है। पानी के सैंपल फैल पाए जाने पर औपचारिक कार्रवाई पूरी कर दोबारा सैंपल लेने होते हैं।
- शहर के 5 बूस्टिंग स्टेशन और एक जलघर के सैंपल भी आए थे फेल
जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले 6 माह के दौरान शहर के बूस्टिंग स्टेशनों और जलघर के सैंपल लिए गए थे ताकि पानी की गुणवत्ता का पता लगाया जा सके। विभाग ने इस दौरान भी लापरवाही बरतते हुए 441 की जगह केवल 28 ही सैंपल लिए थे। इनमें से गांधीनगर, दिल्ली बाईपास, रोजगार्डन व रविदास नगर बूस्टिंग स्टेशन और कपूरी मुख्य जलघर के सैंपल फेल पाए गए थे।
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विभाग द्वारा लैब में जितने भी सैंपल भेजे जाते हैं, उनकी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारी को सौंप देते हैं। जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे गए पानी के सैंपलों में क्लोरिन की मात्रा कम और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा अधिक पाई गई।
-डॉ. सुधीर चौधरी, रासायनिक वैज्ञानिक, प्रयोगशाला