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तीन साल भी बाद सड़कों किनारे से नहीं हटीं रेहड़ियां, कार्रवाई जगह चिह्नित करने तक ही सीमित

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शहर की मुख्य सड़क पर खड़ी रेहड़ियां। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई हुई है, जबकि प्रशासन सड़क किनारे खड़ी होने वालीं रेहड़ियों को बाहरी क्षेत्र में शिफ्ट नहीं कर पाया है। तीन साल पहले यह योजना तैयार की गई थी और इसके तहत रेहड़ीधारकों का सर्वे भी हुआ था, लेकिन कार्रवाई जगह चिह्नित करने तक ही सीमित है। पिछले तीन सालों में चार डीसी बदल चुके हैं, लेकिन रेहड़ियां पहले की तर्ज पर ही लग रही हैं।
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शहर में इस समय 450 से अधिक रेहड़ियां मुख्य सड़कों किनारे पार्किंग जोन में खड़ी हो रही हैं, जिसके चलते वाहन सड़क पर खड़े करने पड़ रहे हैं। पिछले एक साल से तो रेहड़ी शिफ्टिंग का मामला ही ठंडे बस्ते में पड़ा है। तत्कालीन उपायुक्त श्यामलाल पूनिया ने बाजारों में खड़ी होने वालीं रेहड़ियों को बाहरी क्षेत्र में शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। नगर परिषद की ओर से रेहड़ीधारकों का सर्वे भी करवाया गया था। उस दौरान उन्हें रेहड़ी खड़ी करने के लिए जगह और यूनिक आईडी देने का दावा भी किया गया था। इसके साथ ही रेहड़ी लगवाने के लिए चार अलग-अलग जगहों का चयन भी किया गया था, ताकि शहर से भीड़ कम हो और ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
नगर परिषद ने पीएनबी चौक से लेकर रेलवे मोड़ तक फोरलेन पर रेहड़ी खड़ी करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन इसकी सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है और नप अधिकारी ही अपने आदेश भूले बैठे हैं। चर्चा है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते रेहड़ीधारकों पर नप अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं
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इन क्षेत्रों में लगती हैं रेहड़ियां
संवाददाता को वीरवार दोपहर करीब 12 बजे बस स्टैंड रोड पर लोहारू चौक से लेकर परशुराम चौक तक 119 रेहड़ियां खड़ी मिलीं। इसी प्रकार परशुराम चौक से लेकर आंबेडकर चौक तक 116 रेहड़ियां खड़ी मिलीं। आंबेडकर चौक से रेलवे स्टेशन रोड पर 62 रेहड़ियां लगी मिलीं। इसके अलावा परशुराम चौक से रेलवे स्टेशन मोड़ तक 10 रेहड़ियां लगी मिलीं। इसके अलावा शहर की गलियों में कुछ रेहड़ीधारक फेरी लगाकर भी सामान बेचते मिले।
रेहड़ी खड़ी करवाने की एवज में दुकानदारों पर लग चुके रुपये लेने के आरोप
करीब दो माह पहले ही नप अधिकारियों के संज्ञान में आया था कि सरकारी जगह पर दुकानों के सामने रेहड़ी खड़ी करवाने का दुकानदार किराया लेते हैं। यह किराया तीन से चार हजार रुपये मासिक है, जबकि यह जगह सरकारी है और ऐसा करना गैरकानूनी है। इस तरह की बात सामने आने के बाद भी नप अधिकारियों ने रेहड़ियों को बाहर शिफ्ट करवाने की जहमत नहीं उठाई।
ये जगह की गई थीं चिह्नित
प्रशासन की योजना थी कि रेहड़ीधारकों को चार से पांच वेंडिंग जोन दिए जाए। वहां वे अपनी रेहड़ी खड़ी कर सकें। योजना अनुसार रेहड़ी वालों के लिए वेंडिंग जोन में पेयजल और शौचालय समेत टीन शेड की व्यवस्था भी की जानी है। प्रशासन अब तक बस स्टैंड के पीछे, तिकोना पार्क के समीप ही वेंडिंग जोन बनाने के लिए जगह चिह्नित कर पाया है जबकि इससे आगे कार्रवाई नहीं बढ़ी है।
यहां रहता है ट्रैफिक जाम
परशुराम चौक से लेकर पीएनबी चौक तक दिन में आठ से दस बार जाम लगता है। दोपहर को स्कूल बसों के समय तो स्थिति और बुरी हो जाती है। इसी प्रकार परशुराम चौक से लेकर आंबेडकर चौक तक भी ट्रैफिक रेंगकर चलता है। वहीं, आंबेडकर चौक से रेलवे स्टेशन रोड पर भी जाम की स्थिति रहती है।
वर्जन:
सरकार की हिदायत अनुसार इस योजना पर काम किया जा रहा है। टाउन वेंडिंग कमेटी से चिह्नित जगह अप्रूव करवाई जा चुकी है। सरकार के निर्देश अनुसार ही अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - प्रशांत पाराशर, सचिव, नगर परिषद
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