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डीसी ऑफिस के बाहर क्रशर संचालकों ने धरना और क्रमिक भूख हड़ताल की शुरू

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लघु सचिवालय में डीसी ऑफिस के बाहर धरने और भूख हड़ताल पर बैठे क्रशर संचालक। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। सरकार और प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक आश्वासन न मिलने से खफा क्रशर संचालकों ने वीरवार से डीसी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दी। साथ ही क्रशर एसोसिएशन ने एलान किया है कि क्रशरों के संचालन की अनुमति मिलने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। पहले दिन 12 क्रशर संचालक भूख हड़ताल पर बैठे। देर शाम तक प्रदर्शनकारी धरनास्थल पर डटे रहे। वहीं, एसोसिएशन पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि क्रशर संचालक रात को भी धरनास्थल पर डटे रहेंगे।
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क्रशर संचालकों ने वीरवार सुबह ही डीसी कार्यालय के सामने टेंट लगवा दिया। दोपहर करीब 12 बजे क्रशर संचालक एकत्रित होकर लघु सचिवालय पहुंचे और अनिश्चिकालीन धरना शुरू कर दिया। इसके बाद एसोसिएशन प्रधान सोमबीर घसोला समेत क्रशर संचालक क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ गए। क्रशर संचालकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। एसोसिएशन प्रधान सोमबीर घसोला ने कहा कि जिले के क्रशरों के संचालन को लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने का हवाला देकर जिले के 330 क्रशरों को सरकार ने बंद करवा रखा है, जिससे बीस हजार से अधिक परिवार प्रभावित हैं। उनका कहना है कि पिछले करीब डेढ़ माह से यह स्थिति बनी है। क्रशर संचालकों व ट्रांसपोर्टरों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराया हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों से तंग आकर ही क्रशर संचालक यह कदम उठाने को विवश हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार क्रशरों के संचालन को मंजूरी नहीं देती, तब तक डीसी कार्यालय के सामने धरना दिन-रात जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो संचालक अपने परिजनों को भी धरनास्थल पर लेकर पहुंचेंगी। क्रशर संचालकों का कहना है कि प्रशासन का रवैया भी इस मामले में संतोषजनक नहीं है।
हर माह ट्रांसपोर्टर कहां से चुकाये ढाई लाख
धरनास्थल पर ट्रांसपोर्टर भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि क्रशर बंद होने से करीब तीन हजार भारी वाहन खड़े हैं और इनकी मासिक किस्त भरना उनके लिए आसान नहीं है। ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि दो से तीन वाहनों की किस्त ढाई से तीन लाख रुपये की बनती है जो सड़कों पर वाहन चले बिना चुकाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किस्त नहीं भरते हैं तो कंपनी उन्हें ब्लैक लिस्ट कर देगी।
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पहले दिन इन्होंने की भूख हड़ताल
पहले दिन एसोसिएशन प्रधान सोमबीर घसोला, उप-प्रधान जगबीर उर्फ लीलू, बिजेंद्र बोहरा, जगदीश, जयभगवान, चांद, नरेश, कुलदीप कादयान, सोनू साहुवास, मुकेश सेठ, हरीचंद व पाली भूख हड़ताल पर बैठे। शुक्रवार को अन्य 12 क्रशर संचालक भूख हड़ताल करेंगे।
सरकार पर कसा तंज, बोले: राजस्व देने वालों को कर रही कंगाल
धरने के दौरान क्रशर संचालकों ने प्रदेश सरकार पर तंज भी कसे। उन्होंने कहा कि प्रति साल सरकार को 400 करोड़ का राजस्व देने वाले क्रशर संचालकों को सरकार कंगाल बनाने पर तुली है। राजस्थान में क्रशरों का संचालन हो रहा है जबकि प्रदेश सरकार ने प्रदेश में ही संचालन पर लगाई गई पाबंदी को बरकरार रखा हुआ है जिसके चलते क्रशर संचालक आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
प्रदर्शन के बाद भी नहीं मिली मंजूरी
क्रशरों के संचालन की मांग को लेकर संचालकों और ट्रांसपोर्टरों ने गत 20 दिसंबर को शहर में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के साथ क्रशर संचालकों ने लघु सचिवालय पहुंचकर नगराधीश को मांगपत्र सौंपा था। उनसे क्रशरों के संचालन के अनुमति साथ काटे गए बिजली कनेक्शनों को जुड़वाने की मांग भी की गई थी, लेकिन अब तक दोनों मांगों पर स्थिति जस की तस है।
सरकार की तरफ से हमें कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला और इससे खफा होकर ही हमने अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू की है। हम रात को भी धरनास्थल पर डटे रहेंगे। सोमबीर घसोला, प्रधान, जिला क्रशर एसोसिएशन
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