चरखी दादरी। मानसून की 379 एमएम बारिश ने शहर की सीवरेज व्यवस्था के कुप्रबंधों की पोल खोल दी है। शहर में पानी की निकासी सीवर लाइन से न होकर लिफ्टिंग के सहारे है। जलभराव वाले क्षेत्रों से मोटर के जरिये ओपन लाइन डालकर पानी की निकासी की जा रही है। व्यवस्था में सुधार के लिए नई सिरे से सीवर लाइनें डालने की दरकार है। जनस्वास्थ्य विभाग ने इसकी योजना मानसून सीजन शुरू होने के बाद तैयार की है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ा है।
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि तीन सालों से शहर की सीवर व्यवस्था बेपटरी हुई है। आलम यह है कि हर वार्ड में तीन से चार जगहों पर सीवर लाइन ब्लॉक हैं। इसका कारण 40 साल पहले डालीं सीवर लाइन की नियमित सफाई न होना है। हालांकि करीब दो दशक पहले डाली गईं सीवर लाइन का लेवल भी सही नहीं है और जिसके कारण पानी की निकासी सुचारु रूप से नहीं हो पा रही है। जानकारों की मानें तो मास्टर प्लान पर काम पूरा होने के बाद ही शहरवासियों को सीवर व पेयजल समस्याओं से स्थायी छुटकारा मिलेगा। 47 करोड़ की कार्ययोजना इसके लिए तैयार की जा चुकी है।
इस मानसून की बारिश में शहर जलचक्रवात के भंवर में फंसा नजर आया है। जुलाई में हुई पहली बारिश से लेकर एक सितंबर को हुई अंतिम बारिश तक प्रशासन के पास सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से आगे पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं है। मोटर के जरिये एक स्थान का पानी दूसरे जगह पर निकालकर काम चलाया जा रहा है। सीसीआई परिसर समेत अन्य जगह पानी से लबालब है। अब और निकासी करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है, क्योंकि जिन जगहों पर निकासी की गई थी, वहां अब दूषित पानी घरों तक पहुंच चुका है। ऐसे में इन स्थानों पर और पानी की निकासी नहीं की जा सकती है। शिव कॉलोनी में कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है और इस समस्या से त्रस्त लोग दो बार सड़क जाम कर चुके हैं।
मौसम ले रहा करवट, अधिकारियों के छूट रहे पसीने
बाजार और शहर में पानी भरने वालीं जगहों से प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से निकासी करवाई है। एक सितंबर के बाद तेज बारिश नहीं हुई है, लेकिन मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। वीरवार को भी सुबह बूंदाबांदी हुई और बारिश का मौसम देखकर अधिकारियों के पसीने छूटे रहे। इस समय सीटीएम अमित मान देर शाम तक सीवरेज और पानी निकासी व्यवस्था का अधिकारियों के साथ देर रात तक निरीक्षण कर रहे हैं।
नोडल अधिकारी के पास प्रतिदिन आ रहीं तीन से चार शिकायतें
संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि शहर में जलभराव होने पर जिला उपायुक्त ने सीटीएम अमित मान को नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। वे प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर एक बजे सीवर और जलभराव संबंधी शिकायतें भी अपने कार्यालय में सुनते हैं। प्रतिदिन उनके पास से तीन से चार शिकायतें पहुंच रही हैं। सीटीएम का दावा है कि वे सूचना मिलते ही शिकायतों का समाधान करवा रहे हैं।
ये है बेपटरी सीवरेज व्यवस्था का कारण
शहर की सीवर और पेयजल व्यवस्था बेपटरी होने का सबसे अहम कारण लाइनें पुराना होना है। 30 फीसदी शहर में 40 साल पुरानी सीमेंटिड लाइन डली हुई हैं, जो जर्जर हो चुकी हैं। कई जगहों पर सीवर और पेयजल लाइन समांतर डाली हुई हैं, जिसके चलते सीवर लाइन का पानी पेयजल लाइन में मिक्स होकर घरों तक पहुंच रहा है।
पेयजल और सीवर समस्याओं से स्थायी छुटकारा दिलाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने 47 करोड़ का प्रपोजल तैयार कर लिया है। मास्टर प्लान के तहत इन सेवाओं में सुधार होगा। बहुत जल्द इन समस्याओं का स्थायी समाधान होश जाएगा।
अमित मान, सीटीएम एवं जलभराव नोडल अधिकारी
डुंगर वाला जोहड़ से पानी उठान के लिए रखी गई मोटर।- फोटो : CharkhiDadri