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सात जिलों के परीक्षा केंद्रों पर भेजीं 24 बसें, 14 रूटों की सेवाओं में कटौती करने से यात्री रहे परेशान

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सात जिलों के परीक्षा केंद्रों पर भेजीं 24 बसें, 14 रूटों पर यात्री रहे परेशान
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डिपो में बसों की संख्या कम रहने से पांच हजार से अधिक यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी, परीक्षा केंद्रों पर बसों का संचालन होने से रोडवेज को छह लाख से अधिक मिला राजस्व
साढ़े 1200 से अधिक महिला परीक्षार्थियों ने रोडवेज बसों में किया सफर, लोकल रूटों पर चरमराई व्यवस्था
चरखी दादरी। दुर्गा शक्ति कांस्टेबल (महिला) परीक्षा के लिए डिपो की 24 बसें 1250 से अधिक परीक्षार्थियों को सात जिलों के परीक्षा केंद्र पर लेकर पहुंची। दूसरी और लोकल रूटों पर रविवार को बस सेवा चरमराई रही। 14 रूटों पर बसों के पहिये कम घूमने से पांच हजार से अधिक यात्रियों को परेशानियां झेलनी पड़ीं। इन यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए डेढ़ से दो घंटे तक बूथ पर इंतजार करना पड़ा। हालांकि परीक्षा केंद्रों के लिए बसें चलाने से रोडवेज को छह लाख से अधिक का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।
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परीक्षार्थियों की सहूलियतों को देखते हुए डिपो अधिकारियों ने शुक्रवार और शनिवार को एडवांस बुकिंग भी की। इसके आधार पर रविवार को परीक्षा के लिए 24 बसें विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर भेजी गई। रोडवेज की ओर से करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, फरीदाबाद व सिरसा जिलों के परीक्षा केंद्रों पर बसें भेजने से परीक्षार्थियों को काफी सुविधा मिली।
दादरी डिपो के बेडे में 91 बसें हैं जिनमें से 24 रविवार को परीक्षा केंद्रों पर भेजी गई जबकि 67 बसों का संचालन विभिन्न रूटों पर किया गया। रविवार को परीक्षा केंद्रों के अलावा अन्य रूटों पर बसों की संख्या यात्रियों की के लिहाज से कम रही। रोडवेज अधिकारियों का तर्क है कि बसों की संख्या के लिहाज से हरसंभव व्यवस्था बनाने का प्रयास किया। बस कम रहने के चलते कुछ रूटों पर यात्रियों को थोड़ी बहुत दिक्कतें उठानी पड़ीं। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षार्थियों के लिए बसों का संचालन करना भी बेहद जरूरी था। रविवार को दिल्ली और गुरुग्राम के अलावा 12 लॉकल रूटों पर चलने वाली बसों की संख्या घटाई गई।
- इन रूट पर इतनी बस की संख्या की कम
भिवानी रूट पर रविवार को दो बसें कम चलीं। इसी प्रकार लोहारु रूट पर दो, सतनाली रूट पर एक, बेरी रूट पर एक, कोसली रूट पर एक, झोझूकलां रूट पर एक, दिल्ली रूट पर एक, गुरुग्राम रूट पर एक, महेंद्रगढ़ रूट पर दो, झज्जर रूट पर एक, रोहतक रूट पर दो, सेहलंगा रूट पर एक, नूंह रूट पर एक बस कम चली। इसके अलावा छात्राओं के लिए चलने वालीं स्पेशल पांच बसें भी रूट से हटाकर परीक्षा केंद्रों के लिए चलाई गई।
- जानिए...किस जिले में भेजी गईं कितनी बस
करनाल जिले में परीक्षार्थियों के चार बसें भेजी गईं। इसी प्रकार अंबाला में भी चार, पंचकूला में तीन, यमुनानगर में चार, कुरुक्षेत्र में तीन, फरीदाबाद में चार और सिरसा में दो बसें भेजी गईं। प्रत्येक बस में 52 परीक्षार्थियों ने सफर किया है और इस लिहाज से 1250 से अधिक परीक्षार्थियों को बसों के जरिये परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया गया।
- परीक्षा केंद्रों पर बसें भेजने से रोडवेज को यूं हुई आमदनी
करनाल का दोनों तरफ का किराया 380 रुपये है और इस रूट से करीब 80 हजार की आमदनी हुई। अंबाला का किराया 560 रुपये है और यहां से विभाग को एक लाख 16 हजार की इनकम हुई। इसी प्रकार पंचकूला का किराया 660 रुपये है और यहां से एक लाख दो हजार रुपये की आमदनी संभावित है। यमुनानगर आने-जाने का किराया 500 रुपये है और यहां से एक लाख चार हजार की इनकम प्राप्त हुई। कुरुक्षेत्र का किराया 460 रुपये है और यहां से करीब 72 हजार की आमदनी हुई। फरीदाबाद का किराया 400 रुपये है और यहां से करीब 83 हजार की इनकम हुई। इसी प्रकार सिरसा का किराया 420 रुपये है और यहां दो बसें चलने से 44 हजार की आमदनी हुई।
यात्री बोले : घंटों करना पड़ा बस का इंतजार, झेलनी पड़ी दिक्कतें
- मुझे झज्जर वापस लौटना था। पिछले करीब डेढ़ घंटे से बस स्टैंड पर खड़ा हूं, लेकिन झज्जर के बूथ पर बस नहीं लगी है। समय पर पहुंचना बेहद जरूरी है।
हुकमचंद शर्मा, झज्जर निवासी
- मैं किसी काम से दादरी आया था और अब मुझे झांसवां जाना है। सुबह दस बजे बस स्टैंड पहुंचा था और सवा 11 बजे तक भी मुझे झांसवां की बस नहीं मिली है।
रामनिवासी, झांसवां निवासी
- बूथ पर काफी देर इंतजार करने के बाद भी बस नहीं लगी है। मुझे सतनाली जाना है और करीब एक घंटे से अधिक समय से मैं बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रहा हूं।
श्रीभगवान, सतनाली निवासी
- मैं किसी काम से दादरी आया था और अब वापस साल्हावास लौट रहा हूं। सुबह साढ़े नौ बजे से बस स्टैंड पर खड़ा हूं, लेकिन बस नहीं मिली है। प्राइवेट वाहन भी इस रूट पर नहीं है।
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मुकेश, साल्हावास निवासी
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वर्जन::
परीक्षार्थियों के लिए सहूलियतों के लिए परीक्षा केंद्रों पर बसें भेजी गईं। हमने अन्य यात्रियों के लिए हरसंभव व्यवस्था बनाने का प्रयास किया। रूटों पर चलने वालीं बसों की संख्या घटने से थोड़ी परेशानी तो स्वाभाविक है।
सतेंद्र कुमार, डीआई, चरखी दादरी डिपो
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