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दिनभर छाई रहीं काली घटाएं, दो एमएम बारिश और 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली शीतलहर

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ठंड के बीच बस स्टैंड मार्ग से गुजरती महिलाएं। संवाद - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। पश्चिमी विक्षोभ का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। देर रात बूंदाबांदी के बाद वीरवार दोपहर भी फुहारें चलीं। दो एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश के साथ करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली शीतलहर ने ठंड को काफी बढ़ा दिया है। अधिकतम तापमान भी एक ही दिन में 9.1 डिग्री तक गिरकर 13 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री रहा, जबकि बुधवार को न्यूनतम तापमान 8.9 डिग्री था।
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बदलता मौसम लोगों के लिए आफत बना है। पहले लगातार चार दिन तेज धूप खिली और अधिकतम तापमान 23 डिग्री तक पहुंच गया तो बुधवार को मौसम में अचानक बदलाव आया और कोहरे ने लोगों को स्वागत किया। बुधवार देर रात से ही मौसम फिर बदला और रात करीब दो बजे हलकी बूंदाबांदी हुई। जिसकी वजह से मौसम में ठंडक आई। सुबह लोगों को कोहरे ने फिर घेरा तो दिनभर आसमान में काली घटाए छाई रही। दोपहर के समय भी लोगों को देर शाम तक हलके अंधेरे का सामना करना पड़ा। दिनभर काली घटाए छाई रही वहीं बीच-बीच में बूंदाबांदी भी हुई। करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली शीतलहर ने लोगों के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। बाजारों में लोगों की आवाजाही बहुत कम रही वहीं सड़क किनारे लोगों को ठंड से बचाव के लिए अलाव तापते देखा गया।
आज भी रहेगी तीखी ठंड, फिर आएगा घना कोहरा
नोडल अधिकारी पर्यावरण क्लब एवं क्षेत्रिय मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्र मोहन ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का व्यापक असर देखने को मिला है। देर रात डेढ़ बजे से तीन बजे के बीच एनसीआर के साथ लगते जिलों में बूंदाबांदी हुई है। चरखी दादरी में दो एमएम बारिश हुई है। आज रात्रि को और शुक्रवार सुबह तक भी बारिश की संभावना है। चार फरवरी को शाम तक इस मौसम प्रणाली का प्रभाव हरियाणा एनसीआर दिल्ली से हटना शुरू हो जाएगा।
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जिले में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीली हवाएं चलने और आसपास बारिश की गतिविधियां और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि, बादलवाही की वजह से ठंड के तीखे तेवर दिखे हैं। इसके अलावा उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में भारी मात्रा में हिमपात होने की वजह से शुक्रवार को एक बार फिर से जिला में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी।
मौसम के बदले मिजाज से किसान चिंतित
मौसम के बदले मिजाज से किसान भी चिंतित है। उन्हें अधिक बारिश होने पर सरसों, गेहूं की फसल खराब होने की चिंता सता रही है। जनवरी माह में हुई बारिश का पानी अभी भी खेतों में जमा है और उसकी निकासी के लिए उपायुक्त बार-बार अधिकारियों को निर्देश दे चुके है। अब बारिश होती है तो किसानों की फसल को काफी नुकसान होने की संभावनाएं है। साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं से भी फसलों को नुकसान होगा।
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