चरखी दादरी। स्वास्थ्य विभाग भविष्य की बेहतर व्यवस्थाओं की तैयारियों में तो जुटा है मगर वर्तमान में विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे मरीजों की पीड़ा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। सामान्य अस्पताल में न बाल रोग विशेषज्ञ है और न ही ईएनटी, फिजिशियन। विशेषज्ञों के 10 पद रिक्त हैं। जिस कारण मरीजों को भिवानी, रोहतक, हिसार, दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ रहे है। जिले के करीब साढे़ पांच लाख लोग विशेषज्ञों की कमी के कारण परेशान हैं। हालांकि राहत भरी खबर है कि माइक्रोबायोलॉजिस्ट की तैनाती हुई है। जिससे अब आठ माह बाद एलाइजा रीडर मशीन चलेगी। माइक्रोबायोलॉजिस्ट की कमी के कारण सैंपल जांच के लिए पीजीआई रोहतक भेजे जा रहे थे। साथ ही एक एनेस्थेटिक्स की तैनाती हुई है। अस्पताल में एक एनेस्थेटिक्स पहले ही है। अब एक और मिलने से आर्थो ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी हो गई है।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सिविल अस्पताल में सैंपल न भेजने की बात सामने आई थी और उस पर अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए तत्कालीन माइक्रोबायोलॉजिस्ट की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। उसे हटाने के बाद से ही सिविल अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद खाली था। इससे सैंपल तैयार करने और जांच के लिए भेजने में दिक्कतें आ रही थीं। दूसरी ओर अब स्वास्थ्य विभाग सिविल अस्पताल में मॉलीकुलर लैब को अगले सप्ताह से शुरू करने जा रहा है और यहां माइक्रोबायोलॉजिस्ट की तैनाती बेहद आवश्यक थी। इसके मद्देनजर विभाग ने सिविल अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट की तैनाती कर दी है। डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि सरकार ने जिले में एक और एनेस्थेटिक्स तैनात किया है। इससे सामान्य सर्जरी में इससे काफी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में एक एनेस्थेटिक्स पहले ही है। हालांकि डिप्टी सीएमओ डॉ. नरेश भी एनेस्थेटिक्स है, लेकिन इस समय उनके पास अन्य कई चार्ज हैं।
दस रिमाइंडर भेजे, फिर भी अभी तक नियुक्ति नहीं
जिले में विशेषज्ञों की कमी लगातार बरकरार है। 2021 की अगर बात करें तो इन पदों को भरने के लिए स्वास्थ्य विभाग डिमांड के अलावा 10 रिमाइंडर भी भेज चुका है, लेकिन अब तक किसी भी पद पर विशेषज्ञ की स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है। इसका असर सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
जो विशेषज्ञ तैनात, उनके पास संसाधनों की कमी
दादरी जिले में दंत चिकित्सक, आई स्पेशलिस्ट, गाइनी, सर्जन, एनेस्थेटिक्स, ऑरथो, रेडियोलॉजिस्ट आदि विशेषज्ञ तैनात हैं। हालांकि इन सभी को भी कम संसाधनों की कमी खल रही है।
बच्चों के साथ नाक-कान के उपचार की नहीं सुविधा
जिला मुख्यालय अस्पताल में पीडिट्रिशियन(बाल रोग विशेषज्ञ) का पद पिछले कई सालों से खाली है। जिले में बच्चों की संख्या 50 हजार से पार है जबकि स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं। इसी प्रकार ईएनटी का पद खाली होने से नाक-कान की बीमारियों का उपचार नहीं हो पा रहा है। वहीं, हृदय रोग विशेषज्ञ की भी कमी है। इसके अलावा अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट के अभाव में पिछले चार साल से सिविल अस्पताल में अलट्रासाउंड सुविधा बंद है।
विडंबना...ऑर्थो तैनात, ओटी शुरू करने के लिए नहीं संसाधान
सिविल अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती तो विभाग ने कर दी है, लेकिन ऑपरेशन थिएटर शुरू करने के लिए अब तक संसाधन मुहैया नहीं करवाए हैं। ऑर्थो स्पेशलिस्ट की तैनाती हुए छह माह से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन संसाधनों की कमी है। ऐसे में ऑपरेशन के लिए मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा है।
मॉलीकुलर लैब के लिए तैयार हो रहा एलटी का रोस्टर
माइक्रोबायोलॉजिस्ट के अलावा आठ एलटी (लैब टेक्नीशियन) की सेवाएं भी मॉलीकुलर लैब में ली जाएगी। पीडब्ल्यूडी लैब का ढांचा तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सुपुर्द कर चुका है और अगले सप्ताह से लैब में सैंपल की जांच शुरू हो जाएगी। मॉलीकुलर लैब में एलटी की सेवाएं लेने के लिए विभाग रोस्टर तैयार कर रहा है।
वर्जन::
एनेस्थेटिक्स और माइक्रोबायोलॉजिस्ट की तैनाती जिले में हुई है और जल्द ही अन्य विशेषज्ञों की तैनाती भी होने की उम्मीद है। हम इस संबंध में हेड ऑफिस लगातार डिमांड भेज रहे हैं। एक सप्ताह के अंदर हम मॉलीकुलर लैब शुरू कर देंगे और यहां सेवाएं देने के लिए एलटी का रोस्टर तैयार किया जा रहा है।
डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ