चरखी दादरी। लंपी और अफ्रीकन स्वाइन फीवर अब जिले में जानलेवा होते जा रहे हैं। पिछले 24 घंटे की अगर बात करें तो 66 सूअर स्वाइन फीवर की चपेट में आ चुके हैं और इनमें से 12 की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर जिले में लंपी के भी 16 नए केस सामने आए हैं जबकि अब तक वायरस संक्रमित 14 गोवंशों की मौत हुई है। दोनों बीमारियों को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अलर्ट रहने की अपील की है।
स्वाइन फीवर का प्रकोप पिछले 24 घंटे के दौरान जिले में देखने को मिला है जबकि लंपी का प्रकोप पिछले करीब बीस दिन से बना हुआ है। पशुपालन विभाग ने स्वाइन फीवर से ग्रस्त सूअर को अलग स्थान पर रखने की हिदायत दी जा रही है और इसके बाद भी संक्रमित सूअरों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, लंपी के 16 नए केस मिलने के बाद लक्षणयुक्त गायों की संख्या अब 492 हो गई है।
जिले में लंपी वायरस का प्रकोप खत्म नहीं हुआ था कि अब सूअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर ने पशुपालन विभाग अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। जिला में बुधवार को इस फीवर से 12 सूअर की मौत हो गई जबकि 66 फीवर संक्रमित पाए गए हैं। पशुपालन विभाग के एसडीओ एवं नोडल अफसर डॉ. तुलसीराम ने बताया कि सूअर पालकों को आवश्यक हिदायतें दी गई हैं। शहर के रंगीला मंदिर, वाल्मीकि बस्ती, कबीर नगर आदि भागों में विभाग अधिकारियों ने विजिट की और सूअर पालकों को सतर्कता बरतने को कहा। नोडल अफसर डॉ. तुलसीराम ने बताया कि संक्रमित सूअरों को अलग से बाड़ों में रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस फीवर की कोई दवा या वैक्सीन नहीं है। फीवर से ग्रस्त होने पर सूअर की 24 से 48 घंटे में मौत हो जाती है। नोडल अफसर तुलसीराम ने सूअर पालकों से मृतक सूअर को गहरे गड्ढे में दबाए जाने की अपील की है।
लंपी लक्षण वाली 246 गायें हो चुकी ठीक
जिले में लंपी लक्षण वाली 246 गायें अब तक ठीक हो चुकी हैं। पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जसवंत जून ने बताया कि लंपी बीमारी पर नियंत्रण हो रहा है। सभी गायों को टीका लगा दिया गया है। अब इतना खतरा नहीं रहा है। गो पालक जागरूक रहे जबकि विभाग की टीमें लगातार निगरानी रखे हुए हैं।
लंपी का प्रकोप 44 गांवों में, स्वाइन फीवर का केवल शहर में
लंपी की अगर बात करें तो 44 गांवों में अब तक मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, अफ्रीकन स्वाइन फीवर फिलहाल शहर में ही सीमित है। शहर में ही 12 सूअरों की मौत पिछले 24 घंटे के अंदर हुई है और इससे सूअर पालक काफी चिंतित हैं।
लंपी और स्वाइन फीवर को लेकर जिले के पशुपालकों को जागरूक होने की आवश्यकता है। मैंने इस संदर्भ में पशुपालन विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दे दिए हैं। प्रशासन और विभाग सतर्क है और पशुपालकों को घबराने की बजाय सतर्क रहने की आवश्यकता है।
प्रीति, जिला उपायुक्त, चरखी दादरी