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एजेंसी से कचरा उठान कराने को मिली स्वीकृति, सालान 2.82 करोड़ होंगे खर्च

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चरखी दादरी। शहर में सफाई करने की जिम्मेदारी एजेंसी को देने की योजना सरकार ने मंजूर कर ली है। इस संबंध में नगर परिषद के पास स्वीकृति पत्र पहुंच चुका है। इसके अनुसार प्रतिवर्ष शहर की सफाई पर 2.82 करोड़ रुपये खर्च होंगे। टेंडर संबंधी औपचारिकता पूरी करने से पहले अब योजना की विस्तृत रिपोर्ट डीएमसी की मार्फत मुख्यालय भेजी जाएगी और इसे मंजूरी मिलते ही टेंडर आमंत्रित किया जाएगा।
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शहर की आबादी और दायरे के अनुसार नगर परिषद के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसके चलते पिछले लंबे समय से कई वार्डों में सफाई व्यवस्था बेपटरी है। आलम यह है कि शहर में सफाई करने वाले नगर परिषद कर्मचारियों के वार्ड से ही नियमित कचरे का उठान नहीं हो रहा। इन तमाम पहलुओं को देखते हुए नगर परिषद ने सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एजेंसी हायर करने की योजना तैयार कर फाइल मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजी थी। हाल ही में सरकार ने इस योजना को मंजूरी दे दी है और अब अधिकारी अगली प्रक्रिया पूरी करने में जुट गए हैं।
करीब एक माह पहले आयोजित बैठक में पार्षदों ने भी इस योजना पर सहमति दी थी और एजेंडा की कॉपी भी सरकार को भेजी गई थी। सरकार के स्वीकृति देने के बाद एजेंसी से कचरे का उठान कराने का रास्ता साफ हो गया है। ऐसा पहली बार होगा जब एजेंसी शहर से कचरे का उठान करेगी। नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार डीएनआईटी को प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही टेंडर आमंत्रित कर दिया जाएगा और इस पूरी प्रक्रिया में अधिकतम दो माह का समय लग सकता है। इस लिहाज से दिसंबर तक नई सफाई व्यवस्था लागू होने का इंतजार है।
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प्रति साल निकलता है 7200 टन कचरा
दादरी शहर की अगर बात करें तो 21 वार्डों और बाजार से प्रतिदिन 20 टन, प्रतिमाह 600 टन और प्रतिवर्ष करीब 7200 टन कचरा निकलता है। कचरे के निस्तारण के लिए नगर परिषद के वाहन प्रतिदिन 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हैं। इसके बावजूद कुछ वार्ड नियमित कचरा उठान से वंचित रह जाते हैं। एजेंसी हायर करने के बाद कचरा उठान की जिम्मेदारी तय हो जाएगी।
प्रतिमाह खर्च होंगे साढ़े 23 लाख रुपये
सरकार ने शहर की सफाई के लिए एक साल का बजट दो करोड़ 82 लाख रुपये तय किया है। इस लिहाज से सफाई व्यवस्था पर एक माह में करीब साढ़े 23 लाख रुपये खर्चा आएगा। इस समय के खर्च की अगर बात करें तो इससे अधिक बनता है। एक माह में औसतन चार लाख रुपये का डीजल खर्च होता है जबकि 22 लाख से अधिक कर्मचारियों की तनख्वाह बनती है।
ये हैं नप के पास मौजूदा संसाधन
संसाधन- संख्या
ट्रैक्टर-ट्रॉली-5
स्वीपिंग मशीन-1
ऑटो टीपर-27
थ्री व्हीलर-1
डंपर प्लेजर-1
लोडर-1
सफाई कर्मचारी- 220
हाथ रेहड़ी-30
तीन पहिया रिक्शा-20
एजेंसी से कचरा उठान करने की योजना को सरकार ने स्वीकृति दे दी है। जल्द ही औपचारिकताएं पूरी कर धरातल पर काम शुरू कराने का हमारा प्रयास रहेगा।
बक्शीराम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद
सरकार ने 2.82 करोड़ का सालाना बजट सफाई के लिए तैयार किया है। अब हमने अगली प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है। डिएनआईटी को मंजूरी मिलते ही हम टेंडर आमंत्रित कर देंगे।
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मुकेश कुमार, एमई, नगर परिषद
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