चरखी दादरी। चिकित्सकों और विशेषज्ञों समेत संसाधनों की कमी झेल रहे दादरी जिले के लिए बुरी खबर है। यहां तैनात चिकित्सक अपने तबादले करवा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इसका कारण आवास की कमी समेत जिला स्तर की मूलभूत सुविधाएं और स्वास्थ्य केंद्रों पर संसाधनों की कमी है। पिछले दो माह में सात चिकित्सक जिले से तबादला करवा चुके हैं और अब जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्रों के लिए महज 36 चिकित्सक ही बचे हैं।
दादरी जिले में चिकित्सकों के 98 पद स्वीकृत हैं। मई तक की अगर स्थिति देखें जिले में 43 चिकित्सक तैनात थे। अब नौ जुलाई तक जिले में 36 चिकित्सक ही बचे हैं। इस लिहाज से चिकित्सकों के 62 पद खाली हैं और इसका सीधे तौर पर असर जिला अस्पताल के अलावा मातृ-शिशु अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सेवाओं पर पड़ रहा है।
जिले में सिविल अस्पताल के अलावा एक मातृ-शिशु अस्पताल, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके अलावा जिले में करीब 45 उप स्वास्थ्य केंद्र भी हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं बीमार हैं और इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं, विशेषज्ञों की कमी मरीजों की पीड़ा को और बढ़ा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस समस्या का अब तक समाधान नहीं कर पाया है। चिकित्सकों की कमी का दंश जिले के करीब साढ़े पांच लाख लोग झेल रहे हैं। हाल ही में एक सर्जन ने तबादला करवाया और इसके बाद विशेषज्ञों की कमी की सूची और लंबी हो गई है।
- गोपी, बौंदकलां और झोझूकलां सीएचसी में एक्स-रे सेवा बंद
गोपी, बौंदकलां और झोझूकलां में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन तीनों स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे का प्रावधान है, लेकिन तीनों में से किसी भी केंद्र पर एक्स-रे सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण जिले में रेडियोग्राफर की कमी है। जिले में पांच रेडियोग्राफर की जरूरत है जबकि तैनात एक ही है।
- फिजिशयन है न पीडिट्रिशियन, कैसे हो उपचार -
जिले में 17 वर्ष तक के बच्चों की संख्या करीब 60 हजार है। खास बात यह है कि जिले में एक भी पीडिट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) तैनात नहीं है। इसके अलावा जिले में एक भी फिजिशियन नहीं है। इसके अलावा चर्म रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट की कमी भी खल रही है। सिविल अस्पताल में पिछले करीब छह साल से अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद है।
- पीएचसी चल रहे बिन चिकित्सक के, सिविल अस्पताल भी झेल रहा कमी -
जिले में तीन पीएचसी ऐसे हैं जहां स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सक ही तैनात नहीं किए हैं। इनमें सांवड़, इमलोटा और माई कलां शामिल है। सांवड़ मे जहां डेंटल सर्जन से काम चलाया जा रहा है तो माई कलां में फार्मासिस्ट मरीजों का उपचार कर रहा है। इमलोटा में तो चिकित्सक के अलावा डेंटल सर्जन या फार्मासिस्ट तक नहीं है। इसके अलावा सिविल अस्पताल में चिकित्सकों के 36 पद खाली हैं।
जानिए...कैसे स्वास्थ्य केंद्रों पर बनी है चिकित्सकों की कमी -
स्वास्थ्य केंद्र - चिकित्सकों के स्वीकृत पद - तैनात - खाली पद
सिविल अस्पताल - 42-12- 30
मातृ-शिशु अस्पताल - 8-2-6
सीएचसी - 24-9-15
पीएचसी -24-13-11
- सी-आर्म मशीन की कमी दूर होने की जगी उम्मीद
सिविल अस्पताल में करीब पांच माह पहले ऑरथो ऑपरेशन शुरू हो चुके हैं, लेकिन सी-आर्म मशीन की कमी अब तक दूर नहीं हुई है। शुक्रवार को अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचीं स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. वीना सिंह के समक्ष सीएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार समेत ऑरथो सर्जन ने सी-आर्म मशीन की कमी का मुद्दा रखा। इस पर संज्ञान लेकर उन्होंने तत्काल डिमांड भेजने के आदेश दिए। उनके निरीक्षण के बाद सी-आर्म मशीन की कमी दूर होने की उम्मीद जगी है।
वर्जन::
जिले में चिकित्सकों की कमी है और इस संबंध में हम डिमांड उच्चाधिकारियों को भेज चुके हैं। फिलहाल जो चिकित्सक तैनात हैं, वैकल्पिक व्यवस्था कर उन्हीं के सहारे काम चलाया जा रहा है। जिले को चिकित्सक मिलते ही स्वास्थ्य केंद्रों पर बनी कमी को हम दूर कर देंगे।
- डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ।