भिवानी। हालुवास रेलवे फाटक के समीप नगर परिषद की भूमि पर बनी नंदीशाला में चारे का संकट गहरा गया है। इसके साथ नंदीशाला में करीब साढ़े 800 नंदियों पर भुखमरी का संकट भी मंडराने लगा है। नंदियों के लिए चारे का प्रबंध नहीं कर पा रहे प्रशासन से निराश होकर गोसेवकों ने शहर के लोगों से चंदा एकत्रित कर नंदीशाला के नंदियों के लिए एक दिन के चारे का प्रबंध किया। लेकिन सोमवार से फिर नंदियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो जाएगा। जिला प्रशासन भी नंदियों के चारे के लिए बजट नहीं होने का राग अलाप रहा है।
गोसेवकों ने कहा कि नंदीशाला में नंदियों को भूखा मारने से तो अच्छा है कि इन्हें सड़क पर खुला अपने हाल पर छोड़ दिया जाए। गोसेवकों का यह भी आरोप है कि नंदीशाला में कई नंदियों की हालत तो भूख से इतनी खराब है कि वे मरने के कगार पर पहुंच गए हैं। बारिश के बाद नंदीशाला में कीचड़ फैला हुआ हैं, जिसकी वजह से भी नंदियों की हालत दयनीय हो गई है।
32 एकड़ जमीन पड़ी है खाली
भिवानी के हालुवास गेट रेलवे फाटक पार स्थित नगर परिषद की भूमि पर नंदीशाला बनी हुई है। जिला प्रशासन ने शहर में लावारिस घूम रहे नंदियों को नंदीशाला में रखने और उनके लिए चारे का प्रबंध करने का दम भरा था। नगर परिषद की यहां करीब 32 एकड़ भूमि भी है, जो पूरी तरह से खाली पड़ी है। इस भूमि पर नंदियों के लिए आसानी से हरे चारे का प्रबंध हो सकता है, मगर इस दिशा में नगर परिषद और जिला प्रशासन ने कोई कदम ही नहीं उठाए हैं। हालांकि अधिकारियों ने इस पर विचार किया था, मगर कई अधिकारियों की बहानेबाजी ने इस योजना पर भी विराम लगा दिया। अगर इस भूमि में चारा बुआई की जाए तो नंदीशाला में पशुओं के भूखे मरने की नौबत नहीं आती।
सात कर्मचारियों के कंधों पर है जिम्मेदारी
गो सेवकों ने बताया कि नंदीशाला का रखरखाव का जिम्मा नगर परिषद के कंधों पर है, मगर नगर परिषद के अधिकारी यहां पशुओं के लिए कोई चारे का प्रबंध नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पशु चारे के लिए कभी कोई बजट सरकार की तरफ से नहीं आया है। नंदीशाला में करीब सात कर्मचारी भी लगे हैं। बारिश के दौरान नंदीशाला में चारों तरफ कीचड़ फैला हुआ है। यहां कई दिन से नंदी कीचड़ में ही खड़े हैं। वहीं चारा नहीं होने की वजह से नंदियों की हालत भी खराब हो गई है।
चंदा एकत्रित 50 हजार का पशु चारा भिजवाया
गोसेवक संजय परमार, उमाकांत भोली, परमवीर, शुभम, संजय शर्मा, सुमित, मुकेश, आकाश ने बताया कि नंदीशाला में तैनात कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि नंदियों के लिए पशु चारा नहीं है। रविवार को पशु चारे का प्रबंध करने के लिए चंदा एकत्रित किया गया। करीब 50 हजार कीमत का पशु चारा नंदीशाला में भिजवाया गया। इसके बाद नंदीशाला के नंदियों की एक दिन तो भूख शांत हो गई, मगर सोमवार से फिर वहीं हालात बन जाएंगे। गो सेवकों ने बताया कि पहले भी नंदीशाला में पशु चारा खत्म हो चुका है। सरकार की तरफ से बजट नहीं आने का बहाना बनाकर अधिकारी अपने दायित्व से पल्ला झाड़ रहे हैं।
नंदीशाला पर हर माह आ रहा नौ लाख रुपये का खर्च
हालुवास रेलवे फाटक की नंदीशाला पर हर माह करीब नौ लाख रुपये का खर्च आ रहा है। रोजाना ही करीब 30 क्विंटल सूखा चारा व चार ट्राली हरा चारा की खपत हो रही है। पिछले कुछ दिनों से शहर के समाजसेवी बृजपाल सर्राफ द्वारा नंदीशाला में चारे का प्रबंध किया जाता रहा है। लेकिन प्रशासन ने नंदियों के लिए चारा के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।
सोमवार को नंदीशाला में चारे का प्रबंध कराया जाएगा, तब तक 30 क्विंटल चारा नंदियों के लिए उपलब्ध कराया गया है। काफी समय से नंदीशाला के लिए ग्रांट नहीं आ रही है।
-राहुल नरवाल, अतिरिक्त उपायुक्त भिवानी